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नवजात की मौत, अस्पताल में बबाल, पुलिस ने चमकाईं लाठियां

अस्पताल प्रबंधन पर लगाए हत्या का आरोप, आंदोलन के दौरान मुस्लिम समाज के दो गुट आए आमने-सामने, देर रात तक चलता रहा हंगामा
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गुना

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Deepesh Tiwari

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Updated: 24 Apr 2018, 4:01 PM IST

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गुना। जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रसूति गृह में महिला डॉक्टर और स्टॉफ की लापरवाही से एक नवजात शिशु की जान चली गई, प्रसूति की हालत इतनी खराब हो गई, जिसको इलाज के लिए ग्वालियर रैफर किया है। नवजात शिशु की मौत में लापरवाही बरतने वाली महिला डॉक्टर और दोषी स्टॉफ के निलंबन की कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में बीती रात उनके परिजन व समर्थकों ने जमकर बबाल काटा।

दो घंटे से अधिक समय तक हंगामा रहने को देखकर पुलिस ने मोर्चा संभाला। इसी बीच आंदोलनकारी दो गुटों में बंट गए और एक गुट के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढ़ते देख पुलिस ने लाठियां चमकाईं और भगदड़ मच गई। इसके बाद मृत नवजात के शव सहित उसके परिजनों को अस्पताल से कार्रवाई कराने का आश्वासन देकर रवाना कराया।

ये है मामला
केंट स्थित पटेल नगर निवासी इमरान की पत्नी रानू बानो को दर्द होने की स्थिति में उसके परिजनों ने रविवार को सुबह 9 बजे जिला चिकित्सालय के प्रसूति वार्ड में भर्ती कराया था, जिसके बाद प्रसूता की प्रारंभिक जांचें की गईं, जो कि नार्मल थी, दोपहर तक सब ठीक था, दोपहर साढ़े तीन बजे करीब प्रसूता वार्ड के स्टॉफ ने बताया कि डिलीवरी के दौरान आधा शिशु बाहर आया है और आधा अंदर फंस गया। इससे रानू के परिजन घबड़ा गए, चार घंटे बाद डॉक्टर मौके पर पहुंचे आनन-फानन में उसका ऑपरेशन किया गया। चार घंटे से अधिक सुनवाई न होने से नवजात शिशु दम तोड़ चुका था।

मौत के बाद हुआ हंगामा
नवजात शिशु की मौत के बाद उसके परिजनों का गुस्सा बढ़ गया, इसकी भनक मिलते ही इमरान के समाज के लोग और उनके परिजन अस्पताल आ गए और जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर दोषी महिला डॉक्टर ऊषा चौरसिया और दोषी स्टॉफ को निलंबन किए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। इमरान की गोद में मृत बच्चे का शव देखकर लोग वहां आ गए, उन्होंने भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की।

ऐसे हुआ बबाल
बताया गया कि रात्रि दस बजे करीब अस्पताल में बबाल बढ़ते देख डीएसपी अजाक विवेक शर्मा, कोतवाल विवेक अष्ठाना, एसडीएम दिनेश शुक्ला, नायब तहसीलदार इकबाल खान मय पुलिस फोर्स के वहां पहुंचे। उन्होंने मृत बच्चे के प्रति सहानुभूति जताई और उन लोगों को समझाने का प्रयास किया। एसडीएम ने सोमवार को सुबह दोषी लोगों पर कार्रवाई के लिए कलेक्टर से चर्चा करने का आश्वासन दिया। आंदोलनकारियों का कहना था कि महिला डॉक्टर चौरसिया को अभी निलंबित किया जाए और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। इसी बीच कुछ लोगों ने पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा इतना बढ़ गया कि पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी झड़प तक हो गई।

जब दो गुट हुए आमने-सामने
पहले तो इमरान के साथ मुस्लिम समाज के दोनों गुट समर्थन में थे। जब एक गुट पुलिस की बात को समझने के बाद आंदोलन खत्म करने की बात कह रहा था। तभी दूसरा गुट डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई न होने तक आंदोलन खत्म करने की बात पर अड़ा था। एक-दूसरे को समझाने के फेर में दोनों गुट आमने-सामने आ गए। और एक-दूसरे के विरुद्ध नारेबाजी करने लगा। कहीं विवाद न बढ़ जाए, इसको देखते हुए पुलिस आगे बढ़ी ओर हाथों में लाठियां लेकर चमकाई, खदेड़ा तो एक गुट इधर-उधर भागता नजर आया।

लाठियों से खदेडऩे के बाद अस्पताल का माहौल कुछ शांत हुआ, इसी बीच पुलिस के वाहन में मृत बच्चे और उसके पिता को बिठालकर अस्पताल से घर की ओर भेजा। लेकिन उसके परिजन कलेक्टर से मृत नवजात शिशु के साथ कलेक्टर से मिलने की तैयारी में थे, लेकिन कलेक्टर के गुना में न होने की वजह से दोपहर बाद उस बच्चे को दफनाया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

प्रसूति की बिगड़ी हालत
वहीं सोमवार को तडक़े 5 बजे के लगभग प्रसूता की हालत भी अचानक बिगड़ गई, इसको देखकर अस्पताल प्रबंधन ने उसे ग्वालियर रैफर किया है। जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।


नवजात के पिता इमरान की माने तो यदि समय पर महिला डॉक्टर उनकी पत्नी एवं बच्चे की सुध ले लेते तो उनका बच्चा अभी जिंदा होता लेकिन डॉक्टरों ने लापरवाही का रवैया अपनाते हुए उनके बेटे की हत्या की है। जिसकी सजा दोषियों को मिलनी चाहिए।
इमरान