सौ साल पुरानी मुरैना की गजक: सीजन में 10 करोड़ रुपए तक की होती है गजक की ब्रिकी

सौ साल पुरानी मुरैना की गजक: सीजन में 10 करोड़ रुपए तक की होती है गजक की ब्रिकी

Gaurav Sen | Updated: 11 Jul 2019, 12:34:38 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

मुरैना में बनी गजक की विदेशों में भी होती है सप्लाई, पहले से लगाते हैं ऑर्डर

मुरैना. मध्यप्रदेश सरकार जिस मुरैना गजक की ब्रांडिग करने जा रही है उसका स्वाद सौ साल पुराना है। सर्दियों के मौसम में सर्वाधिक पसंद किए जाने वाली गजक देश में ही नहीं विदेशों तक खास डिमांड रहती है। आगरा, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, कलकत्ता, भोपाल, इंदौर के अलावा अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, श्रीलंका आदि देशों तक लोग इसके स्वाद के दीवाने है।

गजक व्यवसायी इसकी गुणवत्ता और किस्मों को लेकर नित-नए प्रयोग करते रहे हैं। शुरूआत में सिर्फ तिल और गुड़ के मिश्रण से पट्टियों के रूप में बनाई जाने वाली गजक की अब लगभग डेढ़ दर्जन वैरायटी बाजार में आ चुकी हैं। गजक कोराबारी कहते है, सरकार ने गजक की ब्रांडिंग के निर्णय से कारोबार को लाभ होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गजक का स्वाद देश-विदेश के कोने-कोन तक पहुंच सकेगा। वर्तमान में मुरैना जिले में गजक का व्यवसाय लगभग 10 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

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विदेशों तक जाती है गजक
सर्दियों के मौसम में सर्वाधिक पसंद किए जाने वाली गजक देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों तक का सफर तय करती है। देश में आगरा, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, कलकत्ता, भोपाल, इंदौर के अलावा अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, श्रीलंका आदि देशों तक नाते-रिश्तेदार लेकर जाते हैं। देश के कई बड़े शहरों में विक्रय के लिए मुरैना से प्रतिदिन सैकड़ों किलोग्राम गजक सप्लाई की जाती है। वहीं यहां के लोग विदेशों में रहने वाले अपने नाते-रिश्तेदारों अथवा मित्रों को भी इसे तोहफे के तौर पर भेजते हैं। विदेशी भी मुरैना की गजक को बड़े स्वाद से खाते हैं।

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पानी की तासीर का नतीजा
कहा जाता रहा है, मुरैना में निर्मित गजक का बेजोड़ स्वाद यहां के पानी की खास तासीर का नतीजा है। तभी तो देश के कई हिस्सों में मुरैना के कारीगर गजक बनाने जाते हैं, लेकिन यहां तैयार होने वाली गजक के जैसा स्वाद नहीं आता। इसलिए अब गजक तैयार करने के लिए मुरैना का पानी भी देश के विभिन्न हिस्सों में मंगाया जाने लगा है।

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गजक की मूर्तियां
मुरैना में गजक का सफर अब लगभग 100 साल का हो चुका है। इस दौरान इस व्यवसाय से जुड़े लोग अपने स्तर पर ही इसकी गुणवत्ता और किस्मों को लेकर नित-नए प्रयोग करते रहे हैं। शुरूआत में सिर्फ तिल और गुड़ के मिश्रण से पट्टियों के रूप में बनाई जाने वाली गजक की अब लगभग डेढ़ दर्जन वैरायटी बाजार में आ चुकी हैं। इनमें तिल फैनी, तिल समोसे, तिल बर्फी, तिल लड्डू, तिल बालूशाही, फ्लेवर्ड गजक रोल सहित ड्रायफ्रूट्स से बनने वाली गजक भी शामिल है। कुछ व्यवसायी तो अब सुगर फ्री गजक भी बनाने लगे हैं। पिछले वर्ष तिल और गुड़ के मिश्रण से तैयार की गई गजक की मूर्तियां भी यहां खासी चर्चाओं में रह चुकी हैं।

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