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ऑनलाइन सिस्टम में अटकीं सोसायटियां, तीन माह की मोहलत की कर रहे हैं मांग

कागजों में दर्ज सोसायटियां अब ऑनलाइन सिस्टम की ‘चाबी’ तलाश रही हैं। सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 27 एवं 28 के तहत ऑनलाइन फाइलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद पुरानी संस्थाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कहीं वर्षों पुरानी इ-मेल आइडी बंद है तो कहीं पासवर्ड का पता नहीं। कई संस्थाओं के पदाधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन पोर्टल पर अब भी पुराने नाम दर्ज हैं। ऐसे में जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद ऑनलाइन अनुपालन की राह अटक गई है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए फम्र्स एंड सोसायटी एडवोकेट बार एसोसिएशन और स्वैच्छिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर फाइलिंग की अंतिम तिथि तीन माह बढ़ाने की मांग की है।
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कागजों में दर्ज सोसायटियां अब ऑनलाइन सिस्टम की ‘चाबी’ तलाश रही हैं। सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 27 एवं 28 के तहत ऑनलाइन फाइलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद पुरानी संस्थाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कहीं वर्षों पुरानी इ-मेल आइडी बंद है तो कहीं पासवर्ड का पता नहीं। कई संस्थाओं के पदाधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन पोर्टल पर अब भी पुराने नाम दर्ज हैं। ऐसे में जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद ऑनलाइन अनुपालन की राह अटक गई है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए फम्र्स एंड सोसायटी एडवोकेट बार एसोसिएशन और स्वैच्छिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर फाइलिंग की अंतिम तिथि तीन माह बढ़ाने की मांग की है।

ऑनलाइन सिस्टम की खामियों के चलते धारा 27-28 की फाइलिंग सहित दूसरे कार्यों में पुरानी संस्थाओं की परेशानी काफी बढ़ गई हैं।

  • पुरानी ई-मेल, भूले पासवर्ड और बदल चुके पदाधिकारी बने ऑनलाइन चाबी का ताला, धारा 27-28 की फाइलिंग में तकनीकी अड़चनें

ग्वालियर. कागजों में दर्ज सोसायटियां अब ऑनलाइन सिस्टम की ‘चाबी’ तलाश रही हैं। सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 27 एवं 28 के तहत ऑनलाइन फाइलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद पुरानी संस्थाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कहीं वर्षों पुरानी इ-मेल आइडी बंद है तो कहीं पासवर्ड का पता नहीं। कई संस्थाओं के पदाधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन पोर्टल पर अब भी पुराने नाम दर्ज हैं। ऐसे में जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद ऑनलाइन अनुपालन की राह अटक गई है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए फम्र्स एंड सोसायटी एडवोकेट बार एसोसिएशन और स्वैच्छिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर फाइलिंग की अंतिम तिथि तीन माह बढ़ाने की मांग की है। 17 अगस्त 2026 से दोनों धाराओं में ऑनलाइन प्रक्रिया लागू की गई थी।

पुराना रिकॉर्ड, नई व्यवस्था… तालमेल ही नहीं
सबसे बड़ी परेशानी वर्षों पहले पंजीकृत संस्थाओं को हो रही है। पंजीयन के समय इस्तेमाल की गई ई-मेल आइडी अब बंद हो चुकी है या उसका पासवर्ड वर्तमान पदाधिकारियों के पास नहीं है। संस्था में पदाधिकारी बदलने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से लॉगिन और सत्यापन की प्रक्रिया भी उलझ रही है। यानी संस्था के पास पंजीयन प्रमाण-पत्र और जरूरी दस्तावेज तो हैं, लेकिन ऑनलाइन खाते तक पहुंचने की ‘चाबी’ नहीं।

गांवों में इंटरनेट ने बढ़ाई मुश्किल
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, सर्वर की धीमी गति और नेटवर्क संबंधी दिक्कतों के कारण दस्तावेज अपलोड करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। संस्थाओं का कहना है कि तकनीकी अड़चनों के बीच निर्धारित समय सीमा में फाइलिंग पूरी करना मुश्किल हो रहा है।

तीन माह की मोहलत के साथ स्थायी समाधान भी
प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि पंजीयन क्रमांक और अधिकृत वर्तमान पदाधिकारी के सत्यापन के आधार पर ई-मेल व मोबाइल नंबर अपडेट तथा पासवर्ड रीसेट की सरल सुविधा दी जाए। जरूरत पडऩे पर जिला स्तर पर फिजिकल वेरिफिकेशन और विशेष हेल्पडेस्क की व्यवस्था भी की जाए। संस्थाओं का कहना है कि मांग सिर्फ तारीख बढ़ाने की नहीं, बल्कि पुराने रिकॉर्ड को नए सिस्टम से जोडऩे की स्थायी व्यवस्था की भी है।

पुराने रिकॉर्ड के कारण ऑनलाइन प्रक्रिया मुश्किल
रिलायबल फाउंडेशन के पदाधिकारी मुनेन्द्र शर्मा ने बताया कि धारा 27 एवं 28 की ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने के बाद उनकी संस्था को पुराने रिकॉर्ड, इ-मेल आइडी, यूजर आइडी और पासवर्ड से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संस्था का पंजीयन वर्षों पहले एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से हुआ था और उस समय दर्ज ई-मेल आइडी अब उपलब्ध नहीं है। इससे ऑनलाइन लॉगिन और प्रक्रिया पूरी करना कठिन हो रहा है। उन्होंने ऑनलाइन व्यवस्था के साथ समानांतर मैन्युअल आवेदन की सुविधा देने की मांग की, ताकि तकनीकी कारणों से किसी संस्था का वैधानिक कार्य प्रभावित न हो।

तीन माह की मोहलत मिले, तभी पूरी हो सकेगी ऑनलाइन फाइलिंग
धारा 27 एवं 28 की ऑनलाइन फाइलिंग पारदर्शिता की दिशा में अच्छा कदम है, लेकिन पुरानी संस्थाओं के रिकॉर्ड, इ-मेल, पासवर्ड और पदाधिकारियों की जानकारी अपडेट न होने से व्यावहारिक परेशानियां आ रही हैं। अंतिम तिथि कम से कम तीन माह बढ़ाने के साथ इ-मेल-मोबाइल अपडेट, पासवर्ड रीसेट और जिला स्तर पर सरल हेल्पडेस्क की व्यवस्था जरूरी है, ताकि कोई संस्था केवल तकनीकी कारणों से अनुपालन से वंचित न रहे।

  • पंकज शर्मा, जोनल चेयरमैन, ग्वालियर रीजन, मध्यप्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन