
नि:शुल्क शव वाहन सेवा
ग्वालियर. अपनों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में जब परिवार अंतिम विदाई की तैयारी में जुटा होता है, आर्थिक परेशानी और शव ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था का संकट दुख को और बढ़ा देता है। जरूरतमंद परिवारों के लिए नि:शुल्क शासकीय शव वाहन सेवा ऐसे वक्त में बड़ा सहारा बन रही है। खासतौर पर अस्पताल से घर या अंतिम संस्कार स्थल तक शव ले जाने के लिए वाहन नहीं मिलने पर यह सेवा परिवारों की परेशानी कम करती है। इससे परिजनों को अंतिम समय में शव ले जाने के लिए निजी वाहन या अन्य साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
प्रदेश में 34,814 परिवारों को लाभ
जेएएस 108 एम्बुलेंस एवं शव वाहन सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत प्रदेश में अब तक 34,814 से अधिक परिवारों को लाभ मिल चुका है। ग्वालियर में पिछले एक साल में 825 मामलों में पार्थिव शरीर को घर, श्मशान घाट या कब्रिस्तान तक पहुंचाया गया। प्रदेश के सभी जिलों में 148 समर्पित शव वाहन 24 घंटे सेवा दे रहे हैं। सेवा का लाभ जरूरतमंद परिवारों को बिना किसी शुल्क के दिया जाता है।
इन परिस्थितियों में मिलती है सुविधा…
सरकारी या मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मृत्यु होने, जिला या सिविल अस्पताल से शव घर ले जाने, पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर पहुंचाने और अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट या कब्रिस्तान तक ले जाने के लिए यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध है। अस्पताल में मृत्यु के बाद परिजन सेवा के लिए संपर्क कर सकते हैं। इसके तहत शव वाहन संबंधित स्थान तक पहुंचकर पार्थिव शरीर को निर्धारित स्थल तक ले जाता है।
अंचल में सेवा
शिवपुरी: 988 परिवार
भिंड: 550 परिवार
मुरैना: 520 परिवार
श्योपुर: 501 परिवार
दतिया: 390 परिवार
इस सेवा का उद्देश्य पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के समय गरिमा और सम्मान के साथ परिवार तक पहुंचाना है। हमारी टीम 24 घंटे मुस्तैदी से सेवा दे रही है।
तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर (पीआरओ), 108 एम्बुलेंस एवं शासकीय शव वाहन सेवा
Updated on:
01 Oct 2026 06:13 pm
Published on:
01 Oct 2026 06:08 pm
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