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हेल्थ से जुड़ी 10 हाईटेक टेक्नीक, घातक बीमारियों को देंगी मात!

स्वास्थ्य जगत ने हाईटेक तकनीक की बदौलत ऐसी कई डिवाइस विकसित कर ली हैं जिनसे असाध्य रोगों का मुकाबला करना आसान होगा। हालांकि इन तकनीकों को भारत आने में समय लगेगा लेकिन ये भविष्य में बेहतर इलाज की उम्मीद तो जगाती हैं।

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स्वास्थ्य जगत ने हाईटेक तकनीक की बदौलत ऐसी कई डिवाइस विकसित कर ली हैं जिनसे असाध्य रोगों का मुकाबला करना आसान होगा। हालांकि इन तकनीकों को भारत आने में समय लगेगा लेकिन ये भविष्य में बेहतर इलाज की उम्मीद तो जगाती हैं।


मोबाइल स्ट्रोक यूनिट

अब हाइटेक उपकरणों से युक्त ऐसी एंबुलेन्स आ गई हैं जो ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति में मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले उसे उपचार देकर जान बचा सकती हैं। ऐसी सुविधा यूरोपियन देशों में मिलने लगी है और जल्दी ही भारत में भी उपलब्ध होगी।


डेंगू का वैक्सीन

फ्रांस की दवा निर्माता कंपनी सनोफी ने डेंगू बुखार के खिलाफ वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल पास कर लिया है। मेक्सिको में इस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए मंजूरी भी दे दी गई है। इस वैक्सीन पर 10 हजार 836 करोड़ रुपए का खर्चा आया है। सनोफी ने डेंगू का वैक्सीन बनाने के लिए 20 साल पहले प्रयास शुरू किए थे।




सस्ती और दर्द रहित खून की जांच

अमरीका की टैसो नामक दवा कंपनी ने ब्लड टैस्ट के लिए ऐसी डिवाइस बना ली है जिससे बिना सुई से जांच के लिए खून लिया जा सकेगा। यह पूरी तरह से दर्द रहित प्रक्रिया होगी। यह डिवाइस कुछ ही दिनों में मार्केट में उपलब्ध होगी।


कोलेस्ट्रॉल घटाने की दवा

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PCSK9
इनहेबिटर्स नाम दिया गया है। अमरीका में इसकी खोज मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के रूप में की गई है। यह ड्रग शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम कर हृदय रोग का जोखिम घटाती है।




एंटीबॉडीज-दवा की जुगलबंदी

वैज्ञानिकों ने शरीर को प्रतिरोधी सुरक्षा देनी वाली एंटीबॉडीज और दवाओं को आपस में मिलाकर कैंसर की ऐसी दवा तैयार की है जो सीधे ट्यूमर सेल्स पर अटैक करती हैं। इसके साइटोटॉक्सिक एजेंट्स स्वस्थ ऊत्तकों को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।


चेकपॉइंट-इनहेबिटर्स

शोधकर्ताओं ने कैंसर की रोकथाम के लिए एक नई थैरेपी विकसित कर ली है। इसमें ऐसी दवाओं का उपयोग किया जा रहा है जो कैंसर के चेकपॉइंट्स के लिए अवरोधक का काम करती हैं। माना जाता है कि कैंसर सेल्स प्रतिरक्षी कोशिकाओं से मुकाबले के लिए ऐसे चेकपॉइंट्स की मदद लेती हैं लेकिन अब दवाएं पहले से ही इन पॉइंट्स को तैयार कर कैंसर बढऩे से रोक सकेंगी।





बिना लीड के कार्डियक पेसमेकर

दुनिया का सबसे छोटा हृदय रक्षक पेसमेकर बनकर तैयार है। इस माइक्रा पेसमेकर को अमरीका में बनाया गया है जो बिना सर्जरी के हृदय में लगाया जा सकता है। इसकी मदद से रोजमर्रा की किसी भी शारीरिक गतिविधि को रोके बिना हृदय की जटिल समस्या दूर की जा सकती है।

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फेफड़ों की बीमारी के लिए मेडिसिन

इडियापेथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस यानी
IPF
ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों के वायुकोषों की आंतरिक संरचना खराब हो जाती है। अब इस बीमारी से निपटने के लिए प्रिफेनिडॉन और निन्टेडेनिब नाम की ऐसी दवाएं बन गई हैं जो वायुकोषों के खराब होने की गति को धीमा करके उन्हें सुरक्षित रख सकती हैं।




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इंट्रा-ऑपरेटिव रेडिएशन थैरेपी

IORT
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए उम्मीदों भरी थैरेपी है। अक्सर ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने से लेकर इलाज होने के बीच काफी वक्त निकल जाता है। इस थैरेपी में एक सिंगल डोज से ट्यूमर को रेडिएशन की मदद से खत्म किया जा सकता है।




हार्ट फैल्योर के लिए नई दवा IORT

एंजियोटेनिसन रिसेप्टर नेप्रिलसिन इनहेबिटर्स या
IORT
एक ऐसा दवा समूह है जिससे रोगियों की जीवन दर बढ़ जाती है। इस तरह की दवाओं का अमरीका में सफलता से परीक्षण किया जा चुका है और इनकी भी बाजार में जल्द आने की संभावना है।