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एलर्जी में धूल कणों और सीलन के कारण भी आती हैं छींकें

अक्टूबर में त्योहारों की तैयारी के लिए लोग साफ-सफाई में जुटे हैं लेकिन इस दौरान डस्ट एलर्जी के मामले भी बढ़ जाते हैं। एलर्जी के कारणों की पहचान जरूरी है।
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Divya Sharma

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Oct 25, 2019

एलर्जी में धूल कणों और सीलन के कारण भी आती हैं छींकें

एलर्जी में धूल कणों और सीलन के कारण भी आती हैं छींकें

गर्मी का मौसम पूरी तरह से समाप्त न होने व सर्द हवाओं से घरों की दीवारों पर मौजूद सीलन सांस नली में प्रवेश कर एलर्जी करती है। एलर्जी के मरीजों को इससे छींकों की समस्या होती है। धूल-मिट्टी कणों व सीलन से बचाव के लिए मुंह पर कपड़ा, स्कार्फ या मास्क पहनकर सफाई करते हैं लेकिन इससे भी दिक्कत बनी रहती है। ये तरीके ६० प्रतिशत तक फायदा करते हैं।
लक्षणों को जानें
मौसम का तापमान एलर्जी के कारक जैसे वायरस और फंगस की संख्या को बढ़ाते हैं। अस्थमा रोगियों में सांसनली अतिसंवेदनशील हो जाती है। एलर्जी के रोगियों में छींकें इसका शुरुआती लक्षण है। आंखों में पानी आना, नाक में खुजली, गले में भारीपन, बलगम बनने से सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है।
घरों में वेंटीलेशन हो
घरों में सफाई के बाद कमरे में सीधे धूप आने दें। धूप नहीं आ पाती तो दरवाजे व खिड़कियां खोल दें ताकि ताजी हवा अंदर आए। एयर कंडीशनर के इस्तेमाल के बाद दरवाजे खोलें। सूक्ष्म कणों से बचाव वाले मास्क भी बाजार में मिल जाते हैं जो एलर्जी की समस्या में राहत देते हैं। हालांकि ये थोड़े महंगे हैं।
टेस्ट व इलाज
एलर्जी की शुरुआती अवस्था में टेस्ट न कराएं, नकारात्मक परिणाम आते हैं। स्टेज खत्म होने और रोग की शिकायत पर सीरम आइजीई टेस्ट कराएं। बचाव के लिए ट्रिगर (कारक) की पहचान जरूरी है।
एक्सपर्ट : डॉ. नरेन्द्र खिप्पल, श्वास रोग विशेषज्ञ, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।