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ARDS: फेफड़ों में भर जाता है पानी, सांस लेना हो जाता है मुश्किल, मेयो क्लिनिक से जानिए क्या है एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम

ARDS Cause: क्या फेफड़ों में पानी भरने से अचानक सांस फूल रही है? मेयो और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए क्या है ARDS (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम), इसके मुख्य लक्षण, कारण।
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भारत

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Nidhi Yadav

Sep 10, 2026

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फेफड़ों में पानी किस कारण से भर जाता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

ARDS Symptoms: सांस लेना हमारे जीवन की सबसे सहज और स्वाभाविक प्रक्रिया है। हम बिना सोचे दिन में हजारों बार सांस लेते हैं। लेकिन सोचिए, अगर अचानक सांस लेने के लिए बहुत ताकत लगानी पड़े, फेफड़ों में हवा ही न पहुंचे और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगे, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है। इसको ARDS (Acute Respiratory Distress Syndrome) यानी एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम कहा जाता है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, ARDS एक खतरनाक स्थिति है, जिसमें मरीज के फेफड़ों की छोटी-छोटी हवा की थैलियों में तरल पदार्थ (पानी) जमा हो जाता है। आइए इसे समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और यह कितनी गंभीर हो सकती है।

क्या होता है ARDS और फेफड़ों में पानी कैसे भरता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारे फेफड़ों के अंदर लाखों छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, जिन्हें एल्वियोली (Alveoli) कहा जाता है। जब हम सांस लेते हैं, तो हवा इन्हीं थैलियों में भरती है और यहीं से ऑक्सीजन खून में घुलती है, जो पूरे शरीर तक पहुंचती है। साथ ही खून से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।जब शरीर में कोई गंभीर बीमारी, इंफेक्शन या बड़ी चोट लगती है, तो फेफड़ों की इन नाजुक थैलियों की दीवारों को नुकसान पहुंचता है। सूजन और चोट के कारण थैलियों की झिल्ली में छेद होने लगते हैं और आसपास की रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ (Fluid) निकलकर इन हवा की थैलियों में भरने लगता है। जब थैलियों में पानी भर जाता है, तो वहां हवा के लिए जगह ही नहीं बचती। नतीजा यह होता है कि खून को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और शरीर के मुख्य अंग (जैसे दिल, दिमाग और गुर्दे) ऑक्सीजन के लिए तड़पने लगते हैं।

ARDS के मुख्य लक्षण कैसे पहचानें?

ARDS के लक्षण बहुत तेजी से और अचानक विकसित होते हैं। अक्सर किसी मुख्य बीमारी या हादसे के 12 से 48 घंटे के भीतर मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। नीचे दिए गए लक्षण ARDS की चेतावनी हो सकते हैं;

  • अत्यधिक तेज सांस फूलना (Severe Shortness of Breath)।
  • तेज और उथली सांसें चलना।
  • ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना।
  • त्वचा, होंठ और नाखूनों का नीला या पीला पड़ना।
  • अत्यधिक थकान और घबराहट।
  • खांसी और सीने में दर्द।

ARDS होने के मुख्य कारण क्या हैं?

ARDS कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो अचानक बिना किसी वजह के हो जाए। यह हमेशा शरीर में पहले से मौजूद किसी गंभीर समस्या, चोट या इंफेक्शन के कारण पैदा होती है। इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं;

  • गंभीर इंफेक्शन (Sepsis)।
  • निमोनिया (Severe Pneumonia)।
  • कोरोनावायरस या अन्य गंभीर वायरल इंफेक्शन।
  • बड़ा हादसा या शारीरिक चोट।
  • जहरीले धुएं या केमिकल को सांस में खींचना।

इसका इलाज और देखभाल कैसे होती है?

ARDS एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसका इलाज घर पर या सामान्य वार्ड में संभव नहीं है। ऐसे मरीजों को तुरंत ICU (इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती करना पड़ता है। फेफड़े खुद से सांस लेने में सक्षम नहीं होते, इसलिए मरीज को मशीन (Ventilator) के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है ताकि शरीर के बाकी अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच सके। जिस वजह से ARDS हुआ है (जैसे निमोनिया या सेप्सिस), उसके लिए एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं दी जाती हैं।फेफड़ों में पानी को और बढ़ने से रोकने के लिए शरीर में ड्रिप और दवाओं के जरिए लिक्विड का बहुत बारीक संतुलन बनाया जाता है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

ARDS एक जानलेवा स्थिति हो सकती है। अगर आपके घर में किसी व्यक्ति को निमोनिया, तेज बुखार या कोई चोट लगने के बाद अचानक सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही हो, तो एक मिनट का भी समय गंवाए बिना मरीज को नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में ले जाएं। समय पर मिलने वाला इलाज मरीज की जान बचा सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।