10 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दिल के वाल्व में होने वाली इस समस्या से बढ़ सकती है धड़कन और सांस की तकलीफ, जानिए Mitral Valve Prolapse

Mitral Valve Prolapse Cause: क्या आपकी भी अकारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है या सांस फूलती है? यह Mitral Valve Prolapse का संकेत हो सकता है। मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक की जानकारी के आधार पर जानें दिल के वाल्व की इस समस्या के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

Sep 10, 2026

mitral valve prolapse symptoms,heart valve prolapse causes,mitral regurgitation shortness of breath,

दिल की धड़कन अचानक तेज क्यों हो जाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Mitral Valve Prolapse Symptoms: हमारा दिल बिना रुके दिन-रात लगातार काम करता है, ताकि पूरे शरीर में खून का बहाव सही तरह से बना रहे। इस काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिल के अंदर चार वाल्व होते हैं, जो दरवाजे की तरह काम करते हैं। इनका काम खून को सही दिशा में आगे बढ़ाना और पीछे बहने से रोकना होता है। लेकिन जब इनमें से कोई वाल्व ढीला पड़ जाए या ठीक से बंद न हो, तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसी ही एक आम स्थिति है माइट्रोन वाल्व प्रोलैप्स (Mitral Valve Prolapse - MVP)। कई बार लोग दिल की धड़कन तेज होने, सीने में हल्की चुभन या थोड़ा सा चलने पर सांस फूलने को मामूली थकान मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन यह आपके दिल के वाल्व में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। आइए इसे समझते हैं।

क्या होता है Mitral Valve Prolapse (माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स)?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारे दिल के बाएं हिस्से में दो खाने (Chambers) होते हैं ऊपरी खाना (Left Atrium) और निचला खाना (Left Ventricle)। इन दोनों के बीच में एक दरवाजा होता है, जिसे माइट्रल वाल्व (Mitral Valve) कहते हैं। सामान्य स्थिति में जब दिल धड़कता है और सिकुड़ता है, तो यह वाल्व मजबूती से बंद हो जाता है ताकि खून वापस पीछे न लौटे। लेकिन माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स की समस्या में इस वाल्व के परदे (Flaps या Leaflets) थोड़े ढीले, चपटे या बड़े हो जाते हैं। जब दिल सिकुड़ता है, तो ये परदे ठीक से बंद होने के बजाय गुब्बारे की तरह पीछे यानी ऊपरी खाने की तरफ लटक (Prolapse) जाते हैं। कई बार इसके कारण थोड़ा-बहुत खून उल्टा बहने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में माइट्रल रिगर्जिटेशन (Mitral Regurgitation) कहा जाता है।

माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स के मुख्य लक्षण

मेयो क्लिनिक के अनुसार, ज्यादातर मामलों में MVP के लक्षण बहुत हल्के होते हैं या सालों तक पता ही नहीं चलते। लेकिन जब यह समस्या थोड़ी बढ़ती है, तो शरीर में ये लक्षण दिखने लगते हैं;

  • तेज धड़कन महसूस होना (Palpitations)।
  • सांस फूलना (Shortness of Breath)।
  • अत्यधिक थकान और कमजोरी।
  • सीने में बेचैनी या दर्द।
  • चक्कर आना या सिर हल्का लगना।

यह समस्या क्यों होती है?

  • आनुवंशिक कारण (Genetics)।
  • संयोजी ऊतक विकार (Connective Tissue Disorders)।
  • उम्र और संरचनात्मक बदलाव।

क्या यह स्थिति खतरनाक है और इसका इलाज क्या है?

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर लोगों के लिए माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स जीवन के लिए खतरनाक नहीं होता और वे इसके साथ एक सामान्य, स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। अगर लक्षण बहुत हल्के हैं, तो किसी खास इलाज की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर समय-समय पर इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram - दिल का अल्ट्रासाउंड) के जरिए वाल्व की स्थिति पर नजर रखते हैं। धड़कन अनियंत्रित होती है या सीने में दर्द रहता है, तो डॉक्टर बीटा-ब्लॉकर्स या धड़कन को नियंत्रित करने वाली दवाएं दे सकते हैं। केवल बहुत गंभीर मामलों में, जहां वाल्व से खून बहुत ज्यादा पीछे लीक हो रहा हो और दिल कमजोर होने लगे, डॉक्टर वाल्व की मरम्मत (Repair) या उसे बदलने (Replacement) की सलाह देते हैं।

जीवनशैली में करें ये छोटे बदलाव

  • कैफीन और सिगरेट से दूरी बनाएं।
  • भरपूर पानी पीएं।
  • हल्का व्यायाम करें।
  • तनाव कम करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको अचानक सीने में तेज दर्द हो, सांस बहुत ज्यादा फूलने लगे या दिल की धड़कन लगातार अनियंत्रित महसूस हो, तो तुरंत किसी कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें। सही समय पर पहचान और उचित देखभाल से आप अपने दिल को हमेशा तंदुरुस्त रख सकते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।