
ड्राइविंग के दौरान कान बंद होना या सांस क्यों फूलता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Barotrauma Symptoms: क्या आपने कभी हवाई जहाज में टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान अचानक कान में भारीपन या दर्द महसूस किया है? या पहाड़ की ऊंची चढ़ाई चढ़ते वक्त कान एकदम से बंद से लगे हैं? हममें से ज्यादातर लोग इसे आम बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस में इसे बैरोट्रॉमा (Barotrauma) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, बैरोट्रॉमा तब होता है जब हमारे शरीर के अंदर मौजूद हवा का दबाव और बाहर के माहौल का एयर प्रेशर आपस में मैच नहीं कर पाता। यह कोई मामूली खिंचाव नहीं है। अगर हवा का दबाव बहुत तेजी से बदले, तो यह आपके कान, फेफड़ों और साइनस को नुकसान पहुंचा सकता है। आइए समझते हैं कि बैरोट्रॉमा क्या है, यह क्यों होता है और शरीर में इसके क्या-क्या लक्षण दिखाई देते हैं।
हार्वर्ड हेल्थ (Harvard Health) अनुसार, हमारे शरीर में कुछ खाली हिस्से होते हैं जहां हवा भरी रहती है जैसे कान का अंदरूनी हिस्सा, नाक के आसपास के साइनस और हमारे फेफड़े। जब आप अचानक बहुत ऊंचाई पर जाते हैं (जैसे प्लेन में उड़ना) या पानी की गहराई में जाते हैं (जैसे स्कूबा डाइविंग करना), तो बाहर का वायुमंडलीय दबाव (Air Pressure) बहुत तेजी से बदलता है। हमारे कान के अंदर यूस्टेशियन ट्यूब (Eustachian tube) नाम की एक पतली नली होती है, जो कान के अंदर और बाहर के दबाव को बराबर बनाए रखने का काम करती है। लेकिन जब बाहरी दबाव अचानक बदलता है और यह नली सही समय पर प्रेशर को बैलेंस नहीं कर पाती, तो शरीर के नाजुक टिश्यूज में खिंचाव आ जाता है। इसी दबाव से होने वाली चोट या तकलीफ को बैरोट्रॉमा कहते हैं।
1.कान का बैरोट्रॉमा (Ear Barotrauma)- यह सबसे आम है। हवाई जहाज में सफर करते वक्त या पहाड़ पर गाड़ी चलाते समय कान अचानक बंद हो जाते हैं, भारी लगने लगते हैं या उनमें तेज दर्द होने लगता है।
2. साइनस का बैरोट्रॉमा (Sinus Barotrauma)- चेहरे की हड्डियों के पीछे मौजूद हवा की थैलियों पर दबाव पड़ने से माथे, आंखों के आसपास और गालों की हड्डियों में बहुत तेज दर्द या खिंचाव महसूस होता है।
3. फेफड़ों का बैरोट्रॉमा (Pulmonary Barotrauma)- यह समस्या सबसे ज्यादा स्कूबा डाइविंग करने वालों में देखी जाती है। पानी के बहुत अंदर जाकर अचानक ऊपर आने पर फेफड़ों की हवा बहुत तेजी से फैलती है, जिससे फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और सांस लेने में भारी तकलीफ हो सकती है।
सफर खत्म होने के काफी देर बाद भी अगर कान का दर्द ठीक न हो, कान से तरल पदार्थ या खून बहने लगे, सुनने की ताकत कम हो जाए, या फिर सांस फूलने लगे, तो इसे मामूली समझकर बिल्कुल न छोड़ें। तुरंत किसी ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ या डॉक्टर को दिखाएं। सही समय पर ध्यान देने से कान और फेफड़ों को किसी बड़े नुकसान से आसानी से बचाया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
26 Aug 2026 02:20 pm
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