
सीधी रेखाएं दिखें टेढ़ी क्यों दिखने लगती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Macular Hole Hindi: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और ढलती उम्र के साथ आंखों में बदलाव आना बेहद आम बात है। लेकिन अगर आपको अपने सामने रखी चीजें अचानक धुंधली दिखाई देने लगें, अखबार पढ़ते समय शब्द गायब होने लगें, या दरवाजे का चौखट, दीवार की रेखाएं और खिड़कियां सीधी दिखने के बजाय मुड़ी हुई या टेढ़ी-मेढ़ी नजर आने लगें तो यह कोई मामूली चश्मे का नंबर बदलने की बात नहीं है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (AAO) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये लक्षण मैकुलर होल (Macular Hole) यानी आंख के पर्दे में छेद होने की बीमारी का इशारा हो सकते हैं। मैक्युलर होल तब होता है जब आपकी मैक्युला में एक गोलाकार छेद बन जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर यह मैकुलर होल क्या होता है, इसके लक्षण क्या हैं, यह क्यों होता है और इससे अपनी आंखों को कैसे बचाया जा सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारी आंखें किसी कैमरे की तरह काम करती हैं। जैसे कैमरे के पीछे एक फिल्म या सेंसर होता है, वैसे ही हमारी आंख के पीछे रेटिना (Retina) नाम का एक पर्दा होता है। इसी पर्दे पर बाहर की दुनिया की तस्वीरें बनती हैं और हमारा दिमाग उन्हें देख पाता है। इस रेटिना के बिल्कुल बीचों-बीच एक बहुत ही छोटा और खास हिस्सा होता है, जिसे हम मैकुला (Macula) कहते हैं। मैकुला का काम होता है हमें एकदम साफ, बारीक और सीधी नजर (Central Vision) देना। जब आप किसी का चेहरा देखते हैं, सुई में धागा पिरोते हैं, गाड़ी चलाते हैं या किताब पढ़ते हैं तो उस वक्त आपकी आंख का मैकुला ही सबसे ज्यादा काम कर रहा होता है। जब इस मैकुला वाले हिस्से में खिंचाव के कारण एक छोटा सा छेद या सुराख बन जाता है, तो इसी स्थिति को मेडिकल भाषा में मैकुलर होल कहा जाता है।
हमारी आंख के अंदर एक जेली जैसा गाढ़ा पदार्थ भरा होता है, जिसे विट्रियस (Vitreous) कहते हैं। जब हम छोटे या युवा होते हैं, तो यह जेली रेटिना के पर्दे से मजबूती से चिपकी रहती है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है (खासकर 60 साल की उम्र के बाद), यह जेली धीरे-धीरे पतली होकर सिकुड़ने लगती है और आंख के पर्दे (रेटिना) को छोड़ने लगती है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। कभी-कभी, जब यह जेली पर्दे से अलग हो रही होती है, तो यह मैकुला वाले हिस्से पर थोड़ा खिंचाव डाल देती है। इस खिंचाव के कारण मैकुला की बारीक परत फट जाती है और वहां एक छोटा सा छेद हो जाता है। इसके अलावा, आंखों में पुरानी चोट लगना, बहुत तेज मायोपिया (पास की नजर का बहुत ज्यादा कमजोर होना) या आंख की पुरानी सूजन भी इसका कारण बन सकती है।
अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर OCT (Optical Coherence Tomography) नाम का एक आसान और दर्द-रहित टेस्ट करते हैं। यह आपकी आंख के पर्दे का एक तरह का 3D स्कैन होता है, जिससे छेद के आकार और गहराई का सटीक पता चल जाता है। मैकुलर होल का इलाज किसी दवा या ड्रॉप्स से नहीं होता। इसके लिए विट्रेक्टॉमी (Vitrectomy) नाम की एक छोटी सी सर्जरी की जाती है। सर्जरी के दौरान डॉक्टर आंख के अंदर से उस खिंचाव पैदा करने वाली जेली को निकाल देते हैं और उसकी जगह एक खास गैस का बुलबुला भर देते हैं। यह गैस का बुलबुला पर्दे के छेद को दबाकर रखता है, जिससे आंख का पर्दा खुद-ब-खुद वापस जुड़ जाता है और छेद बंद हो जाता है। कुछ हफ्तों में वह गैस अपने आप खत्म हो जाती है और उसकी जगह आंख का प्राकृतिक तरल भर जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
26 Aug 2026 12:00 pm
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