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Brain Tumor और Brain Cancer एक जैसे नहीं! रिसर्च से जानें दोनों में क्या है फर्क और क्यों जरूरी है इसे समझना

Brain Tumor VS Brain Cancer: ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन कैंसर में क्या अंतर है? जानिए इन दोनों के बीच का मुख्य फर्क, इनके शुरुआती लक्षण और क्यों बिना कैंसर वाला ट्यूमर भी दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 09, 2026

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Brain Tumor VS Brain Cancer (Source- freepik)

Brain Tumor VS Brain Cancer: जब भी किसी को दिमाग (ब्रेन) से जुड़ी किसी बीमारी के बारे में पता चलता है, तो सबसे पहले मन में कैंसर का ही ख्याल आता है। लोग अक्सर ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन कैंसर को एक ही बीमारी समझ लेते हैं और डर जाते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों में ब्रेन ट्यूमर की जीवित रहने की दर 87% से अधिक है। आइए जानते हैं कि इन दोनों के बीच क्या फर्क होता है इनके लक्षण क्या होते हैं।

क्या होता है Brain Tumor और Brain Cancer

1. ब्रेन ट्यूमर (दिमाग की गांठ)- मेयो क्लिनिक के अनुसार, ट्यूमर का मतलब होता है दिमाग के अंदर कोशिकाओं (cells) का एक असामान्य गुच्छा या गांठ बन जाना। ये दो तरह के होते हैं, बिना कैंसर वाले (Benign) और कैंसर वाले (Malignant)।

2. ब्रेन कैंसर- जब दिमाग की यह गांठ कैंसर वाली (Malignant) होती है, तब इसे ब्रेन कैंसर कहा जाता है। इसके सेल्स बहुत तेजी से बढ़ते हैं और दिमाग के आस-पास के हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं।

दोनों में अंतर क्या होता है?

1. बढ़ने की रफ्तार- बिना कैंसर वाला ब्रेन ट्यूमर बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है, कभी-कभी इसे बढ़ने में सालों लग जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ब्रेन कैंसर के सेल्स बेहद तेजी से बढ़ते हैं, जो दिनों या हफ्तों में ही बड़ा रूप ले सकते हैं।

2. आस-पास फैलना- नॉर्मल ट्यूमर की एक साफ सीमा (boundary) होती है और वह दिमाग के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलता। जबकि कैंसर दिमाग के स्वस्थ हिस्सों के अंदर तक घुस जाता है और रीढ़ की हड्डी (spinal cord) में भी फैल सकता है।

3. दोबारा होने का खत- नॉर्मल ट्यूमर जिस जगह होता है वहीं रहता है और सर्जरी से निकालने के बाद इसके वापस आने के चांस बहुत कम होते हैं। लेकिन कैंसर का स्वभाव आक्रामक होता है, इलाज के बाद भी इसके दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है।

बिना कैंसर वाला ट्यूमर भी क्यों है नुकसानदायक?

अक्सर लोग बिना कैंसर वाला सुनकर राहत की सांस लेते हैं, लेकिन दिमाग के मामले में थोड़ा अलग नियम लागू होता है। हमारा दिमाग एक सख्त हड्डी (खोपड़ी) के अंदर बंद होता है, जहां फैलने के लिए बिल्कुल जगह नहीं होती। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर कोई ट्यूमर कैंसर नहीं भी है, तब भी जैसे-जैसे उसका आकार (size) बढ़ेगा, वह दिमाग के जरूरी हिस्सों पर दबाव बनाएगा। इस दबाव के कारण चलने-फिरने में दिक्कत, बोलने में परेशानी, आंखों से धुंधला दिखना या बेहोशी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, दिमाग के ट्यूमर को कभी भी हल्का नहीं लेना चाहिए, चाहे वह कैंसर हो या ना हो।

दोनों के लक्षण कैसे पहचानें?

दोनों ही मामलों में खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ता है, इसलिए इनके शुरुआती लक्षण लगभग एक जैसे हो सकते हैं;

  • लगातार और तेज सिरदर्द होना।
  • बार-बार उल्टी आना या जी मिचलाना।
  • अचानक दौरे (fits) पड़ना।
  • आंखों की रोशनी कम होना या धुंधला दिखना।
  • शरीर का संतुलन बिगड़ना या हाथ-पैर में कमजोरी आना।
  • याददाश्त कम होना या व्यवहार में बदलाव आना।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।