29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कुछ पुरुष पर्याप्त शुक्राणु क्यों पैदा नहीं करते हैं, स्टडी में सामने आई जानकारी

नए शोध ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया में क्या गलत हो रहा है, जिससे यह समझने में मदद मिली है कि क्यों कुछ पुरुषों में अंडे को निषेचित करने के लिए पर्याप्त शुक्राणु नहीं बनते हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Manoj Vashisth

•

Updated: 21 Oct 2023, 5:51 PM IST

male-infertility.jpg

male infertility treatment

नए शोध ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया में क्या गलत हो रहा है, जिससे यह समझने में मदद मिली है कि क्यों कुछ पुरुषों में अंडे को निषेचित करने के लिए पर्याप्त शुक्राणु नहीं बनते हैं।

दरअसल, दुनिया भर में लाखों जोड़े बांझपन का अनुभव करते हैं, जिनमें से आधे मामले पुरुषों में उत्पन्न होते हैं। 10 प्रतिशत बांझ पुरुषों में बहुत कम या कोई शुक्राणु उत्पन्न नहीं होता है।

यूके में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में वेलकम सेंटर फॉर सेल बायोलॉजी के सहयोग से अमेरिका में स्टोवर्स इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च के नए अध्ययन से संभावित उपचारों पर संभावित सिद्धांत सामने आ सकते हैं।

स्टोवर्स इन्वेस्टिगेटर स्कॉट हॉले ने कहा, "पुरुषों में बांझपन का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि उनमें शुक्राणु नहीं बन पाते हैं। यदि आप वास्तव में जानते हैं कि क्या गलत है, तो अभी ऐसी प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं, जो आपको इसे ठीक करने का एक तरीका दे सकती है।"

मनुष्यों सहित अधिकांश यौन प्रजनन करने वाली प्रजातियों में, शुक्राणु और अंडाणु कोशिकाओं का उत्पादन करने के लिए जाली की तरह पुल जैसी एक महत्वपूर्ण प्रोटीन संरचना को ठीक से बनाने की आवश्यकता होती है।

जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि चूहों में, इस पुल में एक और बहुत विशिष्ट बिंदु को बदलने से यह ढह गया, जिससे बांझपन हो गया और इस प्रकार अर्ध-सूत्रीविभाजन के साथ समान समस्याओं के कारण पुरुषों में मानव बांझपन की जानकारी मिली।

अर्ध-सूत्रीविभाजन, शुक्राणु और अंडों को जन्म देने वाली कोशिका विभाजन प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें से एक बड़ी प्रोटीन संरचना का निर्माण होता है, जिसे सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स कहा जाता है।

हॉले लैब और वेलकम सेंटर के अन्वेषक ओवेन डेविस ने समझाया, "बांझपन में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता अर्ध-सूत्रीविभाजन में दोष है। यह समझने के लिए कि गुणसूत्र प्रजनन कोशिकाओं में सही तरीके से कैसे अलग हैं, हम वास्तव में इस बात में रुचि रखते हैं कि जब उनके बीच सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स बनता है तो उससे ठीक पहले क्या होता है।"

लेखकों ने चूहों में एक प्रमुख सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स प्रोटीन में उत्परिवर्तन करने के लिए एक सटीक जीन संपादन तकनीक का उपयोग किया, जिसने शोधकर्ताओं को पहली बार जीवित जानवरों में प्रोटीन के प्रमुख क्षेत्रों के कार्य का परीक्षण करने की अनुमति दी।

मॉडलिंग प्रयोगों से अनुमानित केवल एक उत्परिवर्तन को चूहों में बांझपन के दोषी के रूप में सत्यापित किया गया था।

हॉले ने कहा, "हमने इस विशाल संरचना में एक प्रोटीन के एक छोटे से क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके बारे में हमें पूरा यकीन था कि यह बांझपन का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।"

बिलमायर ने कहा, "मेरे लिए वास्तव में रोमांचक बात यह है कि हमारा शोध हमें इस बुनियादी प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकता है जो जीवन के लिए आवश्यक है।"

--आईएएनएस

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।