
diabetes
ब्लड ग्लूकोज को मॉनिटरिंग करना टाइप 1 एंड टाइप 2 डायबिटीज़ दोनो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कनाडा के तीन में से एक व्यक्ति को मधुमेह है। बहुतों को तो पता ही नहीं है। मधुमेह एक ऐसी समस्या है जो डॉक्टरों कहने पर इंसुलिन गतिविधि द्वारा विशेषता है। इंसुलिन शरीर में हार्मोन है जो ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट के चयापचय के लिए जिम्मेदार है। इसलिए मधुमेह के साथ, ग्लूकोज का स्तर ऊंचा हो जाता है। यह तब व्यक्तियों को अंधापन, गुर्दे की बीमारी और उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे में डालता है।
डिबिटिज को या तो टाइप 1 के रूप में बताया जाता है। जो युवा लोगों को प्रभावित करता है और ऐसा लगता है कि इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल है, या टाइप 2, जो वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है। टाइप 2 मधुमेह में, अग्न्याशय इंसुलिन स्रावित करते समय उचित प्रतिक्रिया नहीं देता है। और आनुवंशिकी से लेकर जीवन शैली तक विभिन्न कारक शामिल हो सकते हैं।
परंतु एक बात तो कॉमन होती है टाइप वन और टाइप तो दोनों तरह के डायबिटीज में आपके ब्लड ग्लूकोस लेवल को नियंत्रण में रखना और इसका परीक्षण करते रहना अत्यंत जरूरी है।
एक प्रकार की प्रक्रिया जो डायबिटीज के परीक्षण के लिए लैब रूम में की जाती है। वह है आपके यूरिन का टेस्ट करना इसके लिए आपको यूरीन सैंपल जांच में देने से 2 घंटे पूर्व तक भूखा रहना होता है।
किंतु अब इसे जांच करने के अलग-अलग डिवाइज बाजार में उपलब्ध हैं।
ब्लड ग्लूकोज परीक्षण में सबसे हालिया विकास मॉनिटर हैं जिन्हें "उंगली चुभने" की आवश्यकता नहीं होती है। ये मॉनिटर या तो फ्लैश ग्लूकोज मॉनिटर या निरंतर ग्लूकोज मॉनिटर हैं। दोनों को पहनने के लिए एक सेंसर की आवश्यकता होती है। आमतौर पर कई हफ्तों तक, जो ग्लूकोज के स्तर की निगरानी के लिए कार्य करता है।
Updated on:
7 Feb 2022, 6:10 PM IST
Published on:
7 Feb 2022, 6:09 PM IST
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