
LinkedIn browsing can trigger imposter syndrome, research finds
दुनिया भर में 93 करोड़ से ज्यादा यूज़र वाले लिंक्डइन जैसे प्रोफेशनल सोशल नेटवर्किंग साइट्स, आपके मन में आत्म-संदेह ला सकते हैं, ऐसा एक नए शोध से पता चला है।
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि लिंक्डइन पर आने वाले "इंपोस्टर सिंड्रोम" और "पकड़े जाने" का डर, बेचैनी और डिप्रेशन की वजह बन सकते हैं।
शोध में सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि लिंक्डइन पर एक्टिव रहने का सीधा संबंध इंपोस्टर सिंड्रोम से है। जहां लोगों को अपने कामयाबियों के बावजूद भी खुद में कमतर महसूस होता है। ये अहसास तब भी होता है जब वे दूसरों के पोस्ट्स पढ़ते हैं या खुद अपनी उपलब्धियां शेयर करते हैं।
डॉ. बेन मार्डर, यूनिवर्सिटी की बिजनेस स्कूल से, कहते हैं, "लिंक्डइन के न्यूज़फीड को देखने या खुद अपनी सफलता पोस्ट करने से भी आपकी प्रोफेशनल पहचान पर सवाल उठ सकते हैं, जो इंपोस्टर सिंड्रोम को बढ़ा सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा शोध बताता है कि सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव सिर्फ दूसरों से तुलना करने से नहीं होता, बल्कि इस सोच से भी होता है कि दूसरे हमें खुद से ज्यादा काबिल समझते हैं।"
शोधकर्ताओं ने 506 लोगों पर लिंक्डइन के प्रभाव का अध्ययन किया। सभी प्रतिभागी कम से कम स्नातक थे और उनकी औसत आयु 36 साल थी।
शोधकर्ताओं ने दो तरीकों से लिंक्डइन के प्रभाव का परीक्षण किया। एक, दूसरों के पोस्ट पढ़ने के बाद कैसा महसूस होता है और दूसरा, अपनी सफलताएं पोस्ट करने के बाद कैसा महसूस होता है।
ऑनलाइन प्रयोग में पाया गया कि दूसरों के पोस्ट पढ़ने से इंपोस्टर सिंड्रोम का अनुभव थोड़ा ज़रूर बढ़ता है, जबकि पोस्ट न पढ़ने पर ऐसा कम होता है।
शोध में यह भी पाया गया कि लिंक्डइन पर पोस्ट करने का सीधा संबंध इंपोस्टर सिंड्रोम से है, भले ही अन्य संभावित प्रभावों को नियंत्रित करने के बाद भी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भले ही ये साइट्स कैरियर एडवांसमेंट, प्रोफेशनल कनेक्शन और इंडस्ट्री-रिलेटेड ज्ञान देते हैं, लेकिन उनका एक नकारात्मक पहलू भी है।
यह जानना कि इंपोस्टर सिंड्रोम प्रोफेशनल्स में आम है, कर्मचारी विकास योजनाओं को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कर्मचारियों को यह जानकर कि दूसरे भी उनसे मिलते-जुलते अनुभव करते हैं, उनके नकारात्मक भाव कम हो सकते हैं।
मुख्य बातें:
लिंक्डइन का इस्तेमाल impostor syndrome को बढ़ा सकता है।
दूसरों के पोस्ट पढ़ने और खुद की उपलब्धियां पोस्ट करने से ये खतरा बढ़ता है।
impostor syndrome के आम होने का पता चलने से कर्मचारी विकास में मदद मिल सकती है।
Updated on:
18 Dec 2023 10:23 am
Published on:
18 Dec 2023 10:23 am
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