
Meconium (representative image) image credit gemini
Meconium In Newborns: नवजात बच्चे की पहली पॉटी को मेकोनियम (Meconium) कहा जाता है। यह काले या गहरे हरे रंग की, चिपचिपी और तारकोल जैसी होती है। आमतौर पर बच्चे जन्म के 48 घंटे के भीतर मेकोनियम पास करते हैं। कई बार बच्चा जन्म से पहले या प्रसव के दौरान मेकोनियम पास कर देता है और उसे सांस के साथ फेफड़ों में खींच सकता है। ऐसी स्थिति को मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम (Meconium Aspiration Syndrome) कहा जाता है। इससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी और रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम तब होता है जब नवजात बच्चा जन्म से ठीक पहले या जन्म के दौरान मेकोनियम को सांस के साथ फेफड़ों में खींच लेता है। मेकोनियम चिपचिपा होने के कारण बच्चे की सांस की नलियों में फंस सकता है। इससे वायुमार्ग में रुकावट हो सकती है, फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है।
अगर बच्चे ने मेकोनियम को सांस के साथ फेफड़ों में खींच लिया है, तो उसमें कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
नवजात बच्चे की पॉटी अलग-अलग रंग की हो सकती है। जन्म के बाद शुरुआती दिनों में इसका रंग और बनावट बदलना सामान्य है। बच्चे को स्तनपान कराया जा रहा है या फॉर्मूला मिल्क दिया जा रहा है, इसका असर भी पॉटी के रंग और बनावट पर पड़ सकता है।
मेयो क्लिनिक (mayoclinic) के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद पहली पॉटी काले या गहरे हरे रंग की और तारकोल जैसी चिपचिपी हो सकती है। इसे मेकोनियम (Meconium) कहा जाता है। यह बच्चे द्वारा जन्म के बाद पास की जाने वाली पहली पॉटी होती है।
मेकोनियम निकल जाने के बाद बच्चे की पॉटी का रंग पीला-हरा हो सकता है। यह बच्चे की पॉटी में होने वाला एक सामान्य बदलाव हो सकता है।
स्तनपान करने वाले नवजात बच्चों की पॉटी आमतौर पर पीले रंग की, नरम और ढीली होती है। इसमें छोटे-छोटे दाने दिखाई दे सकते हैं और इसका रंग हल्के सरसों जैसा हो सकता है।
अगर नवजात बच्चा फॉर्मूला मिल्क पीता है, तो उसकी पॉटी पीली या टैन रंग की हो सकती है और इसमें हल्का हरा रंग भी दिखाई दे सकता है। स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में फॉर्मूला फीड लेने वाले बच्चों की पॉटी थोड़ी ज्यादा ठोस हो सकती है। हालांकि, यह आमतौर पर नरम मिट्टी या पीनट बटर से ज्यादा सख्त नहीं होती।
बच्चे की पॉटी का हरे रंग का होना भी सामान्य हो सकता है। केवल हरे रंग की पॉटी होने पर आमतौर पर चिंता करने की जरूरत नहीं होती। बच्चे के ठोस आहार (Solid Food) लेना शुरू करने के बाद उसकी पॉटी में कई अलग-अलग रंग दिखाई दे सकते हैं।
बच्चे की पॉटी के रंग, बनावट या उसे पॉटी करने की फ्रीक्वेंसी को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खासकर अगर बच्चे की पॉटी:
अगर बच्चे की पॉटी बार-बार कठोर, सूखी या निकालने में मुश्किल हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वहीं, अगर बच्चा जन्म से पहले मेकोनियम पास कर देता है, तो डॉक्टर सीजेरियन डिलीवरी की सलाह दे सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
07 Aug 2026 03:27 pm
Published on:
07 Aug 2026 03:27 pm
