
पढ़िए 'शुभ पानी' पर यह कविता
नल बंद करो जरा
‘पानी बहना अशुभ है’
बढ़ती बेरोजगार शिक्षा ने
इसे अधकचरी आस्था बना दिया
टांकों के बरसाती पानी ने
विकास की सड़कों पर धरना दे दिया...
हांफते नलकूपों ने
धरती का सीना निचोड़ लिया
बूंद बूंद लेकर रेत को
तन्हाई का आलम दे दिया
मिट्टी के कोठारों को भी
कितना सूना कर दिया....
सूर्य से साक्षात्कार करते जल ने
संकल्प लेना छोड़ दिया
बादलों ने शहर शहर
सरगम पर नृत्य छोड़ दिया
घटाओं ने जलाशयों से
ताल मिलाना छोड़ दिया....
सूखते जलाशय बच्चों में
प्राण फूंकना बंद करने लगे
भुरभुरी रेत के टीले
बिन पानी दीवारें चुनने लगे
निष्प्राण हुए धूल के कण
दम घोंटने लगे
शुभता छोड़ कर पानी
शराब की फैक्ट्रियों में रकम होने लगा
कारखानों की नालियों से निकलने लगा
ये पानी पनघट के ठहाके छोड़
घरों में कैंसर करने लगा
ये यमुना सा पानी त्रासदियां करने लगा
धरती का विलाप सुन कर
ग्लेशियर पिघलने लगा
मगर झरने सा बहने की जगह
समंदर का स्तर बढ़ाने लगा
ये पानी सैलाब लाने लगा
हां पानी अब सैलाब लाने लगा
ये पानी रंग बदलने लगा
ये पानी अब काला होने लगा
पत्थर को घिस कर
रेत बनाना बंद करने लगा
रेत का माफिया पनपाने लगा
बाजार की दौड़ में
ये पानी भी बिकने लगा
प्लास्टिक में बंद पानी
मिट्टी की सुंगंध खोने लगा
अपनी ही मिट्टी से
पंच अंग से दूर करने लगा
चलो इस कंटिंजेंसी
पानी की शुभता का संकल्प लें जाएं/ घरों में टांके बनाएं
पानी के कोठार सजाएं
बच्चों में प्राणों का संचार कराएं
धवल चांद फिर थाली में ले आएं!
Updated on:
11 Apr 2023 01:14 pm
Published on:
11 Apr 2023 01:14 pm
