22 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

UTI in Monsoon: मानसून में बढ़ रहे यूटीआई के मामले, NCBI और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें वजह और बचाव के उपाय

UTI in Monsoon Cause: मानसून में बढ़ जाते हैं यूरिन इन्फेक्शन (UTI) के मामले। इसलिए, क्लीवलैंड क्लिनिक से समझिए इसके मुख्य कारण, लक्षण और इस इंफेक्शन से कैसे बचा जा सकता है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

Jun 22, 2026

UTI in monsoon ,Urinary tract infection symptoms,Causes of UTI in rainy season

प्यास न भी लगे, तो भी दिनभर में 8 से 10 गिलास साफ पानी जरूर पीएं।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- freepik)

UTI in Monsoon Symptoms: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई बीमारियां भी लाता है। इन्हीं में से एक बड़ी परेशानी है यूरिन इन्फेक्शन (पेशाब की नली में इंफेक्शन)। आपने ध्यान दिया होगा कि मानसून आते ही इसके मरीज अचानक बहुत बढ़ जाते हैं।

एनसीबीआई (NCBI) और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इस मौसम में हमारी कुछ आदतें और आसपास का माहौल ऐसा हो जाता है कि बैक्टीरिया बहुत जल्दी फैलते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।

मानसून में यूरिन इन्फेक्शन बढ़ने वजहें

1. हवा में उमस और पसीना- बारिश के दिनों में हवा में चिपचिपाहट (उमस) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। बैक्टीरिया को फैलने के लिए ऐसी ही नमी और गर्मी की जरूरत होती है। इस मौसम में पसीना ज्यादा आता है और कपड़ों के अंदर नमी बनी रहती है। इस वजह से ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं और पेशाब के रास्ते अंदर चले जाते हैं।

2. पानी कम पीना- गर्मी खत्म होते ही लोग अक्सर पानी पीना कम कर देते हैं क्योंकि प्यास कम लगती है। लेकिन उमस की वजह से शरीर से पसीना तो निकलता ही रहता है। जब आप पानी कम पीते हैं, तो पेशाब भी कम आता है। बार-बार पेशाब जाने से अंदर के बैक्टीरिया बहकर बाहर निकल जाते हैं। लेकिन जब पानी ही कम पिएंगे, तो बैक्टीरिया अंदर जमा होकर इंफेक्शन फैला देते हैं।

3. भीगे कपड़े पहने रखना- बारिश में भीगना या देर तक नमी वाले कपड़े पहने रहना सबसे खतरनाक है। चाहे वो जिम के बाद पसीने से भीगे कपड़े हों या बारिश का पानी, अगर आप इनरवियर (अंडरगारमेंट्स) को तुरंत नहीं बदलते हैं, तो वहां बैक्टीरिया का घर बन जाता है। यह नमी बैक्टीरिया को सीधे शरीर के अंदर पहुंचने का मौका देती है।

4. गंदा पानी और टॉयलेट की सफाई- मानसून में हर तरफ पानी जमा होने से गंदगी बढ़ती है। कई बार भारी बारिश की वजह से घरों के नलों में भी गंदा या दूषित पानी आने लगता है। ऐसे पानी का इस्तेमाल करने से या टॉयलेट की साफ-सफाई न रखने से इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

इन लक्षणों को पहचानें यूटीआई (UTI)

  • पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द होना।
  • बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा होना, लेकिन जाने पर बहुत कम पेशाब आना।
  • पेशाब का रंग साफ न होकर मटमैला (धुंधला) दिखना या उसमें से तेज बदबू आना।
  • पेट के निचले हिस्से या पीठ में दर्द रहना।
  • कभी-कभी हल्का बुखार आना या कंपकंपी लगना।

खुद को इंफेक्शन से कैसे बचाएं?

प्यास न भी लगे, तो भी दिनभर में 8 से 10 गिलास साफ पानी जरूर पिएं। यह बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने का सबसे आसान और बेस्ट तरीका है।अगर आप बारिश में भीग गए हैं, तो घर आते ही सबसे पहले नहाएं। जब भी टॉयलेट आए, तुरंत जाएं। पेशाब रोकने से बैक्टीरिया को अंदर बढ़ने का पूरा समय मिल जाता है। टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह सफाई करें। बाहर के या पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते समय खास सावधानी बरतें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।