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दीपावली और अन्य उत्सवों में पटाखों की तेज आवाज शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा रही है। यह स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा भी बन सकती है। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और हृदय या सांस की बीमारी से पीड़ित लोग इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। समझिए, पटाखों की आवाज से होने वाले नुकसान क्या है, और कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
पटाखों की तेज आवाज 150 dB तक या उसे पार कर जाती है जहां सुनने की क्षमता तुरंत प्रभावित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 150 dB पर सुनने का कोई सुरक्षित समय नहीं होता। यह सुनने की कोशिकाओं को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है।
एक भारतीय अध्ययन में पाया गया कि दीपावली के दौरान 3 मीटर की दूरी पर पटाखों की आवाज औसतन 150 dB थी, जिससे 2.5% लोगों में 30 dB तक की स्थायी सुनने की कमी (सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस) देखी गई, और सबसे अधिक प्रभावित 9–15 वर्ष के बच्चे थे।
एक अन्य अध्ययन में 4–14 वर्ष के 53 बच्चों में पटाखों और खिलौना बंदूकों की तेज आवाज से अंदरूनी कान को नुकसान, टिनिटस (कान में घंटी बजना), चक्कर आना और कुछ मामलों में कान की झिल्ली फटने जैसे लक्षण दर्ज किए गए। इसके अलावा, एक रिपोर्ट में बताया गया कि पटाखे 160 dB तक की पीक आवाज पैदा कर सकते हैं, जो तुरंत सुनने को नुकसान पहुंचा सकती है और बच्चे सबसे संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया प्रमाणित चिकित्सक से सलाह लें।
Updated on:
31 Oct 2026, 4:46 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 4:46 PM IST
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