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पटाखों की आवाज कान की झिल्ली फाड़ रही, बहरा भी हो सकते हैं; सुनने वाले से अधिक फोड़ने वाले को खतरा!

पटाखे फोड़ने की खुशी में छिपा है एक गंभीर खतरा। पटाखों की तेज आवाज न केवल आपके कानों को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि यह हमेशा के लिए बहरा बना सकती है।
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Ravi Gupta

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Updated: 31 Oct 2026, 4:46 PM IST

Credit- Janani AI

दीपावली और अन्य उत्सवों में पटाखों की तेज आवाज शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा रही है। यह स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा भी बन सकती है। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और हृदय या सांस की बीमारी से पीड़ित लोग इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। समझिए, पटाखों की आवाज से होने वाले नुकसान क्या है, और कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

सबसे ज्यादा जोखिम में कौन?

पटाखों की तेज आवाज 150 dB तक या उसे पार कर जाती है जहां सुनने की क्षमता तुरंत प्रभावित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 150 dB पर सुनने का कोई सुरक्षित समय नहीं होता। यह सुनने की कोशिकाओं को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है।

एक भारतीय अध्ययन में पाया गया कि दीपावली के दौरान 3 मीटर की दूरी पर पटाखों की आवाज औसतन 150 dB थी, जिससे 2.5% लोगों में 30 dB तक की स्थायी सुनने की कमी (सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस) देखी गई, और सबसे अधिक प्रभावित 9–15 वर्ष के बच्चे थे।

एक अन्य अध्ययन में 4–14 वर्ष के 53 बच्चों में पटाखों और खिलौना बंदूकों की तेज आवाज से अंदरूनी कान को नुकसान, टिनिटस (कान में घंटी बजना), चक्कर आना और कुछ मामलों में कान की झिल्ली फटने जैसे लक्षण दर्ज किए गए। इसके अलावा, एक रिपोर्ट में बताया गया कि पटाखे 160 dB तक की पीक आवाज पैदा कर सकते हैं, जो तुरंत सुनने को नुकसान पहुंचा सकती है और बच्चे सबसे संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

पटाखों की आवाज से होने वाले नुकसान

  • सुनने का नुकसान: तेज आवाज सुनने की कोशिकाओं को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे सुनने की क्षमता घट सकती है।
  • कान में घंटी बजना (टिनिटस), कान बंद होना, चक्कर आना और कान की झिल्ली फटने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
  • नींद में खलल, चिड़चिड़ापन, तनाव, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याएं भी तेज आवाज से जुड़ी हुई हैं।
  • पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों के लिए और भी खतरनाक हो सकता है।

कैसे बचाव करें

  • पटाखे ना फोड़ें।
  • दूरी बनाएं: पटाखों से कम से कम 5–6 मीटर दूर रहें। दूरी बढ़ने से आवाज का प्रभाव काफी कम हो जाता है।
  • कान की सुरक्षा: WHO सलाह देता है कि तेज आवाज वाले माहौल में ईयरप्लग या इयरमफ जैसे कान सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें।
  • “ग्रीन क्रैकर्स” का उपयोग करें: CSIR-NEERI द्वारा विकसित ग्रीन क्रैकर्स पारंपरिक पटाखों की तुलना में ध्वनि और प्रदूषण दोनों में कमी लाते हैं। इनकी ध्वनि 105–115 dBA तक सीमित होती है और प्रदूषण में 30–45% तक कमी होती है।
  • समय सीमित करें: तेज आवाज के संपर्क में रहने का समय कम रखें और बीच-बीच में कानों को आराम दें।
  • संवेदनशील लोगों की देखभाल: बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोग पटाखों से दूर रहें या कानों की अतिरिक्त सुरक्षा अपनाएं।
  • कान में घंटी बजना या सुनने में दिक्कत हो तो खुद को हरसंभव बचाने की कोशिश करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया प्रमाणित चिकित्सक से सलाह लें।