
Credit- Janani AI
सोते समय मोबाइल फोन का उपयोग हमारी नींद पर गहरा प्रभाव डालता है। यह केवल एक आम धारणा नहीं है, बल्कि कई वैज्ञानिक अध्ययनों से प्रमाणित तथ्य है। नीचे हम समझेंगे कि ऐसा क्यों होता है, कौन-कौन से जोखिम हैं, और आप इसे कैसे सुधार सकते हैं।
एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन (2020) में 1,925 छात्रों (आयु 17–23 वर्ष) पर पाया गया कि मोबाइल स्क्रीन का उपयोग 24 घंटे में 8 घंटे या उससे अधिक होने पर नींद में खलल, नींद की अवधि में कमी और दिन में नींद आने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से, बत्ती बंद होने के बाद मोबाइल का 30 मिनट से अधिक उपयोग (बिना ब्लू-लाइट फिल्टर के) और मोबाइल को तकिए के पास रखना नींद की गुणवत्ता को खराब करता है।
एक व्यापक मेटा-विश्लेषण (36,485 प्रतिभागी, 17 अध्ययन) ने दिखाया कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग नींद की खराब गुणवत्ता से जुड़ा है, और प्रत्येक अतिरिक्त उपयोग इकाई के साथ नींद खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बिस्तर पर मोबाइल के उपयोग से नींद में देरी होती है - लगभग हर 5 मिनट मोबाइल उपयोग पर नींद आने में 4 मिनट और देरी होती है, और 10 मिनट उपयोग से रात में जागने का समय 9 मिनट तक बढ़ जाता है।
भारत में भी एक अध्ययन (566 प्रतिभागी, 2014–2019) में यह पाया गया कि मोबाइल उपयोग अधिक होने पर नींद की गुणवत्ता खराब होती है (PSQI ≥5, p=0.01)। मोबाइल उपयोग से N2 और N3 नींद चरणों तक पहुंचने में देरी होती है (उदाहरण के लिए, N2 तक पहुंचने में 13.5 मिनट बनाम 6.5 मिनट; p=0.02)।
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बिस्तर पर सोते समय स्मार्टफोन का उपयोग नींद में देरी, नींद की अवधि में कमी, नींद की अक्षमता और दिन में नींद आने जैसी समस्याओं से जुड़ा है।
इन सबके अतिरिक्त, एक व्यापक समीक्षा (55 अध्ययन, 41,716 प्रतिभागी) ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उपयोग और नींद की खराब गुणवत्ता के बीच स्पष्ट संबंध पाया—विशेष रूप से पूर्वी संस्कृतियों में यह प्रभाव अधिक था।
स्वीडन-फिनलैंड के COSMOS कोहोर्ट अध्ययन (लगभग 25,000 प्रतिभागी) में मोबाइल कॉल समय और नींद संबंधी समस्याओं के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं मिला। हालांकि, सबसे अधिक कॉल समय (>258 मिनट/सप्ताह) वाले समूह में अनिद्रा (insomnia) की संभावना थोड़ी बढ़ी (OR 1.24), लेकिन यह RF-EMF के कारण नहीं, बल्कि अन्य व्यवहारिक कारणों से हो सकता है।
एक कनाडाई अध्ययन (Sleep Health, अक्टूबर 2025) में पाया गया कि स्क्रीन उपयोग और नींद की गुणवत्ता में कोई स्पष्ट अंतर नहीं था लेकिन यह एक स्व-रिपोर्टेड अध्ययन था और कारण-प्रभाव स्पष्ट नहीं था। फिर भी, नींद विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन की मानसिक उत्तेजना और नींद हार्मोन मेलाटोनिन पर प्रभाव नींद को प्रभावित कर सकता है।
नींद बेहतर करने के लिए कुछ आसान और प्रभावी उपाय हैं:
यदि ऊपर दिए गए उपायों के बावजूद नींद में लगातार परेशानी हो रही हो जैसे कि नींद न आना, बार-बार जागना, दिन में अत्यधिक थकान तो किसी नींद विशेषज्ञ या डॉक्टर से मिलना उचित रहेगा।
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। यदि नींद संबंधी गंभीर समस्या हो, तो योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
Updated on:
30 Oct 2026, 11:49 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 11:49 AM IST
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