3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कुर्सी पर बैठने जैसी होती है इस योगासन की मुद्रा, जानिए उत्कटासन के फायदे और सावधानियां

उत्कटासन में बिना कुर्सी के कुर्सी पर बैठने जैसी मुद्रा बनाई जाती है। जानिए इस योगासन को करने का सही तरीका और शरीर को मिलने वाले फायदे।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Adarsh Thakur

•

Updated: 2 Nov 2026, 4:27 PM IST

Utkatasana Benefits

सांकेतिक इमेजः Gemini

योग में कई ऐसे आसन हैं, जिन्हें करने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती, लेकिन उनका अभ्यास शरीर को मजबूत और संतुलित बनाने में मदद कर सकता है। ऐसा ही एक आसन है उत्कटासन, जिसे चेयर पोज यानी कुर्सी वाला आसन भी कहा जाता है। इस आसन में व्यक्ति बिना कुर्सी के बैठने जैसी मुद्रा बनाता है। नियमित और सही तरीके से इसका अभ्यास करने से जांघों, पिंडलियों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है। साथ ही शरीर का संतुलन बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है।

उत्कटासन का अर्थ

उत्कटासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। उत्कट का अर्थ शक्तिशाली या कठिन और आसन का अर्थ शारीरिक मुद्रा होता है। इसे अंग्रेजी में चेयर पोज कहा जाता है। इस आसन में घुटनों को मोड़कर कूल्हों को पीछे की ओर ले जाया जाता है, जैसे कोई व्यक्ति काल्पनिक कुर्सी पर बैठ रहा हो।

इस मुद्रा में शरीर का भार पैरों पर रहता है और हाथों को ऊपर उठाया जाता है। इसे करते समय जांघों और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखना पड़ता है।

उत्कटासन करने के 5 फायदे

1. जांघों और पैरों को मिलती है मजबूती

उत्कटासन करते समय शरीर का भार पैरों पर रहता है। इससे जांघों, पिंडलियों और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित अभ्यास से इन मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

2. शरीर का संतुलन बेहतर होता है

इस आसन में घुटनों को मोड़कर एक ही स्थिति में रुकना पड़ता है। ऐसा करने के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। नियमित अभ्यास से शारीरिक संतुलन और स्थिरता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

3. पैरों और टखनों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं

उत्कटासन के दौरान पैरों और टखनों को शरीर का भार संभालना पड़ता है। इससे इन हिस्सों की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, टखने या घुटने में पहले से दर्द होने पर इस आसन को सावधानी से करना चाहिए।

4. शरीर की सक्रियता और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद

इस मुद्रा को कुछ समय तक बनाए रखने के लिए मांसपेशियों को लगातार सक्रिय रखना पड़ता है। इससे शारीरिक सहनशक्ति विकसित करने में मदद मिल सकती है। शुरुआत में कम समय तक अभ्यास करें और धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाएं।

5. एकाग्रता और धैर्य का अभ्यास

उत्कटासन करते समय शरीर को स्थिर रखना और सांस पर ध्यान देना जरूरी होता है। इससे व्यक्ति को अपनी मुद्रा और सांस के प्रति जागरूक रहने का अभ्यास मिलता है। योग में इसे मानसिक एकाग्रता और धैर्य विकसित करने वाली मुद्रा के रूप में भी देखा जाता है।

उत्कटासन करने का सही तरीका

  • सबसे पहले योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच सुविधानुसार थोड़ा अंतर रख सकते हैं।
  • अब सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं।
  • सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ें और कूल्हों को पीछे की ओर ले जाएं।
  • ऐसा महसूस करें जैसे आप किसी काल्पनिक कुर्सी पर बैठ रहे हैं।
  • रीढ़ को सीधा और छाती को खुला रखें। घुटनों को पैरों की दिशा में रखें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार कुछ सेकंड इस मुद्रा में रुकें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करते हुए वापस खड़े हो जाएं।

शुरुआत में 10 से 15 सेकंड तक इस मुद्रा में रुकना पर्याप्त हो सकता है। अभ्यास बढ़ने पर समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।

उत्कटासन करते समय इन गलतियों से बचें

  • घुटनों को जरूरत से ज्यादा आगे न जाने दें।
  • कमर को बहुत ज्यादा आगे या पीछे न मोड़ें।
  • शरीर का पूरा भार पंजों पर न डालें। एड़ियों को जमीन पर टिकाए रखें।
  • कंधों को कानों की तरफ खींचकर न रखें।
  • सांस रोककर आसन करने की कोशिश न करें।
  • शुरुआत में बहुत नीचे बैठने की कोशिश न करें।

किन लोगों को नहीं करना चाहिए उत्कटासन?

अगर आपको घुटनों, टखनों, कूल्हों या कमर में चोट या तेज दर्द है, तो इस आसन का अभ्यास बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें। गठिया, संतुलन की समस्या या दूसरी पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों में भी सावधानी जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान इसे करने से पहले डॉक्टर और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लें।

आसन करते समय दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो तो तुरंत सामान्य स्थिति में लौट आएं। जरूरत पड़ने पर दीवार का सहारा लेकर या कम गहराई तक घुटने मोड़कर अभ्यास किया जा सकता है।

उत्कटासन को अपनी योग दिनचर्या में शामिल करने से पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने और शारीरिक संतुलन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए सही तकनीक, नियमित अभ्यास और अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है।

( डिस्क्लेमरः यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या डॉक्टर से संपर्क करें।)