3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सर्दियों में बार-बार क्यों होती है बीमारी? ठंड ही नहीं, ये 6 वजहें भी हो सकती हैं जिम्मेदार

सर्दियों में बार-बार सर्दी, खांसी और बुखार होना आम परेशानी है, लेकिन इसके पीछे सिर्फ ठंड जिम्मेदार नहीं होती। जानिए इस मौसम में संक्रमण का खतरा क्यों बढ़ जाता है।
4 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Adarsh Thakur

•

Updated: 2 Nov 2026, 3:54 PM IST

Winter Illness

सांकेतिक इमेजः Gemini

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों को बार-बार सर्दी, खांसी, गले में खराश और बुखार की परेशानी होने लगती है। कुछ लोग ठीक होने के कुछ दिन बाद फिर बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में अक्सर माना जाता है कि इसकी वजह ठंड लगना है, लेकिन इसके पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

दरअसल, सर्दियों में फ्लू और दूसरे श्वसन संक्रमण फैलाने वाले वायरस सक्रिय रहते हैं। इस मौसम में लोग घरों और बंद कमरों में ज्यादा समय बिताते हैं। अगर वहां हवा का आवागमन कम हो, तो संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों तक वायरस पहुंचने की आशंका बढ़ सकती है। आइए जानते हैं सर्दियों में बार-बार बीमार पड़ने की 6 प्रमुख वजहें।

1. बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना

ठंड से बचने के लिए लोग दरवाजे और खिड़कियां बंद रखते हैं। इससे कमरे में ताजी हवा का आवागमन कम हो सकता है। अगर कमरे में कोई व्यक्ति पहले से संक्रमित है, तो उसके खांसने, छींकने या बात करने से निकले वायरस के कण हवा में फैल सकते हैं।

कम वेंटिलेशन वाले कमरे में इन कणों की मात्रा बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए सर्दियों में भी मौसम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए खिड़की-दरवाजे खोलकर ताजी हवा आने देना जरूरी है।

2. सर्दियों में वायरस का ज्यादा फैलना

सर्दियों में फ्लू और कई अन्य श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। ठंडे और शुष्क वातावरण में कुछ वायरस ज्यादा समय तक सक्रिय रह सकते हैं। इसके अलावा लोग घरों, स्कूलों और दफ्तरों में एक-दूसरे के करीब रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने के अवसर बढ़ जाते हैं।

सामान्य सर्दी-जुकाम कई तरह के वायरस से हो सकता है। इसलिए एक बार संक्रमण से ठीक होने के बाद भी किसी दूसरे वायरस के संपर्क में आने पर दोबारा बीमार पड़ना संभव है।

3. ठंडी और शुष्क हवा का असर

सर्दियों में हवा में नमी कम हो सकती है। ठंडी और शुष्क हवा नाक और सांस की नलियों की अंदरूनी परत को प्रभावित कर सकती है। यह परत शरीर को वायरस और दूसरे बाहरी कणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जब नाक की अंदरूनी परत सूखती है, तो संक्रमण से बचाव की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल शुष्क हवा से संक्रमण नहीं होता। बीमारी फैलने के लिए वायरस के संपर्क में आना भी जरूरी है।

4. हाथों की सफाई में लापरवाही

सर्दियों में लोग अक्सर नाक साफ करने, खांसने या छींकने के बाद हाथ धोना भूल जाते हैं। संक्रमित सतह को छूने के बाद उन्हीं हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने पर कुछ वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

इसलिए खाने से पहले, बाहर से घर आने पर और खांसने या छींकने के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है। साबुन और पानी उपलब्ध न होने पर अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. नींद और दिनचर्या का बिगड़ना

सर्दियों में कई लोगों की दिनचर्या बदल जाती है। सुबह देर से उठना, शारीरिक गतिविधियां कम करना और पर्याप्त नींद न लेना आम हो सकता है। लंबे समय तक खराब नींद और तनाव शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित समय पर सोना, पर्याप्त नींद लेना और अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना शारीरिक गतिविधियां करना जरूरी है। संतुलित आहार भी शरीर को जरूरी पोषण उपलब्ध कराने में मदद करता है।

6. पहले से मौजूद बीमारियां

अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और दूसरी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सर्दियों में विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है। ठंड के कारण सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और श्वसन संक्रमण होने पर परेशानी गंभीर हो सकती है।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी संक्रमण का ज्यादा खतरा हो सकता है। ऐसे लोगों को लक्षण दिखने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

सर्दियों में बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचें?

  • हाथ धोने की आदत डालें: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ साफ करें।
  • घर में हवा का आवागमन रखें: ठंड से बचाव करते हुए कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलें, ताकि ताजी हवा आ सके।
  • बीमार व्यक्ति से दूरी रखें: घर में किसी को खांसी या बुखार हो तो संभव हो तो उसके संपर्क को सीमित रखें।
  • मास्क का इस्तेमाल करें: भीड़भाड़ वाली जगहों और संक्रमण के ज्यादा खतरे वाले वातावरण में मास्क पहनना उपयोगी हो सकता है।
  • टीकाकरण पर ध्यान दें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू और अन्य जरूरी टीके लगवाएं।
  • नींद और खान-पान सुधारें: पर्याप्त नींद लें और भोजन में फल, सब्जियां, दालें तथा प्रोटीन के स्रोत शामिल करें।
  • शरीर को गर्म रखें: ठंड में पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और बहुत कम तापमान में लंबे समय तक रहने से बचें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर सर्दी-खांसी बार-बार हो रही है, लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या ठीक होने के बाद फिर गंभीर हो जाते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराएं। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या भ्रम जैसी स्थिति होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

सर्दियों में बीमार पड़ने से बचने के लिए केवल गर्म कपड़े पहनना काफी नहीं है। साफ-सफाई, बेहतर वेंटिलेशन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और जरूरी टीकाकरण भी महत्वपूर्ण हैं।

( डिस्क्लेमरः यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या डॉक्टर से संपर्क करें।)