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इलाज के लिए नहीं थे पैसे इसलिए बहन की हुई थी मौत, आज गरीबों का फ्री इलाज करा रहा है ये टैक्सी ड्राइवर

सैदुल ने 2004 में अपनी छोटी बहन मारुफा को खो दिया था। जब सैदुल की बहन महज 17 साल की थी तभी वह इस दुनिया को अलविदा कह गई।
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नई दिल्ली

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Priya Singh

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Updated: 14 May 2018, 1:31 PM IST

Taxi driver building hospital in memory of his sister

नई दिल्ली। शहर तो क्या जिले के नक्शे में भी खोजने पर नहीं मिलने वाले कोलकाता के इस गांव से करीब 55 किलोमीटर पुनरी गांव के रहने वाले भाई ने एक नै मिसाल कायम की है। इस गांव के रहने वाले शख्स की तारीफ खुद देश के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है। इनके इस वाह वाही! के पीछे का कारण बहुत ही मार्मिक है। करीब 40 साल के सैदुल लस्कर एक टैक्सी ड्राइवर हैं उनके मजबूत इरादे ऐसे हैं कि अपने बल-बूते पर उन्होंने गरीबों के लिए अस्पताल खोला, और इतना ही नहीं वहां होने वाला इलाज बिल्कुल नि:शुल्क भी किया। आपको बता दें सैदुल ने 2004 में अपनी छोटी बहन मारुफा को खो दिया था। जब सैदुल की बहन महज 17 साल की थी तभी वह इस दुनिया को अलविदा कह गई। मारुफा छाती संक्रमण से पीड़ित थी। जब उसकी बहन इस बीमारी से जूझ रही थी तब सैदुल ने पास उसका इलाज कराने के लिए पैसे नहीं थे। गरीब सैदुल की इसी मजबूरी ने उसे उसकी बहन से जुदा कर दिया था।

अपनी जान से भी ज्यादा प्यारी बहन को खोने के बाद सैदुल पूरी तरह से टूट गए थे। वो आने आप को न कामियाब और मजबूर समझने लगे थे लेकिन जल्द ही सैदुल ने अपने आपको समेटा और अनपी मजबूरी को हराकर एक इरादा ठान लिया कि वह अपने आसपास रहने वाले किसी को भी बिना इलाज मरने नहीं देंगे। मीडिया में दिए अपने इंटरव्यू में सैदुल ने कहा कि- "मैंने ठान लिया कि मुझे कुछ ऐसा करना है कि कोई गरीब बिना इलाज के मौत को न गाले लगाए। मेरे आस-पास का कोई भाई मेरी तरह अपनी बहन को न खोए। यही कारण है कि मैंने गरीबों के लिए नि:शुल्क अस्पताल खोलने का फैसला किया।" सैदुल बताते हैं कि उनके इस कदम में मेरी पत्नी ने मेरी हर संभव मदद की। उनकी पति ने अस्पताल के लिए जमीन खरीदने को अपने सारे जेवर भी सैदुल को दे दिए।

एक दिन सैदुल की आपबीती सुन सृष्टि घोष नाम की लड़की ने अपने पहले महीने की पूरी तनख्यवाह अस्पताल खोलने के लिए दान कर दी। सैदुल बताते हैं कि सृष्टि में उन्हें उनकी खोई हुई बहन याद आती है। सैदुल का सपना 12 साल बाद इस साल 17 फरवरी को पूरा हुआ। दो मंजिला अस्पताल का 'मारुफा स्मृति वेलफेयर फाउंडेशन' नाम रखा गया है। सैदुल ने इस अस्पताल का उद्घाटन सृष्टि से ही करवाया। उद्घाटन वाले दिन 286 मरीजों का इलाज किया गया। अस्पताल के पूरी तरह परिचालित हो जाने पर 100 गांवों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि वर्तमान में 8 डाक्टर हैं, जो नि:शुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।