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छह साल से रोज 60 किलो दाना, बाबा रामदेव मंदिर की छत पर कबूतरों के लिए चार दोस्तों की सेवा

हुब्बल्ली शहर के गब्बुर गली स्थित बाबा रामदेव मंदिर की ध्वजा के पास बने चबूतरे पर पिछले छह साल से रोज कबूतरों के लिए चुग्गा डाला जा रहा है। छह साल पहले महज एक किलो अनाज से शुरू हुई यह सेवा अब बढ़कर प्रतिदिन करीब 60 किलो तक पहुंच गई है। सर्दी, गर्मी या बारिश—मौसम कोई भी हो, चुग्गा डालने का सिलसिला नहीं रुकता। इस सेवा से जुड़े रामलाल जणवा चौधरी बाली, केसाराम चौधरी हरजी, कल्याणसिंह राठौड़ शिवगंज और भरत राजपुरोहित सिलोर राजस्थान के पाली, जालोर, सिरोही और बालोतरा जिले के रहने वाले हैं। वर्तमान में चारों हुब्बल्ली में व्यवसाय करते हैं। बाबा रामदेव के प्रति आस्था ने चारों दोस्तों को पक्षी सेवा से जोड़ा और अब यह उनके जीवन की नियमित दिनचर्या बन चुकी है।
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कबूतरों को चुग्गा डालते हुए रामलाल जणवा चौधरी बाली, केसाराम चौधरी हरजी एवं कल्याणसिंह राठौड़ शिवगंज।

कबूतरों को चुग्गा डालते हुए रामलाल जणवा चौधरी बाली, केसाराम चौधरी हरजी एवं कल्याणसिंह राठौड़ शिवगंज।

कट्टों में अनाज लेकर खुद पहुंचते हैं मंदिर की छत तक

कबूतरों के चुग्गे के लिए अनाज मंदिर के ऊपर बने एक कमरे में एकत्र करके रखा जाता है। चारों दोस्त अनाज से भरे कट्टों को खुद मंदिर की छत तक पहुंचाते हैं और चबूतरे पर कबूतरों के लिए चुग्गा डालते हैं। कबूतरों के पानी पीने के लिए यहां चार पात्र भी रखे गए हैं। चुग्गे में मुख्य रूप से ज्वार का उपयोग किया जाता है। इसके साथ बाजरा, गेहूं और मक्का भी मिलाया जाता है। सामान्य दिनों में रोज करीब 60 किलो अनाज डाला जाता है। बारिश के बाद और सर्दी के मौसम में कबूतरों की संख्या बढ़ने पर चुग्गे की मात्रा करीब एक क्विंटल तक पहुंच जाती है।

भक्तों के सहयोग से चलता है चुग्गे का इंतजाम

चुग्गे के लिए अनाज की व्यवस्था भक्तों के सहयोग से होती है। शिवशक्ति प्लास्टिक के बाबूलाल देवासी हर महीने 11 बैग यानी करीब 330 किलो ज्वार उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा कई भक्त अपनी श्रद्धानुसार हर महीने 30 से 60 किलो तक अनाज उपलब्ध करवाते हैं। दर्जनों अन्य भक्त भी इस सेवा में सहयोग करते हैं। कबूतर सुबह करीब 6 से 7 बजे, दोपहर 11 से 12.30 बजे और दोपहर बाद करीब 2.30 से 3.30 बजे तक चुग्गा चुगने पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह और शाम दो समय चुग्गा डाला जाता है।

बारिश थमते ही बढ़ जाती है कबूतरों की संख्या

सेवा से जुड़े लोगों के अनुसार बारिश के दौरान कबूतर खेतों में आसानी से दाना नहीं चुग पाते। बारिश थमने के बाद बड़ी संख्या में कबूतर मंदिर पहुंचते हैं। सर्दी में भी कबूतरों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे समय रोजाना करीब एक क्विंटल तक चुग्गा डालना पड़ता है। इससे पहले हुब्बल्ली में रहने वाले राजस्थान मूल के गोपाल दर्जी सायला भी यहां कबूतरों के लिए चुग्गा डालते थे। उनके बाद चारों दोस्तों ने इस सेवा को आगे बढ़ाया और पिछले छह साल से इसे लगातार जारी रखा है।

कबूतरों के साथ कौओं और कुत्तों की भी सेवा

चारों दोस्तों की सेवा केवल कबूतरों तक सीमित नहीं है। हर शनिवार गदग रोड स्थित हनुमान मंदिर में कौओं और कुत्तों के लिए पानी, ब्रेड और बिस्किट की व्यवस्था भी करते हैं। यहां पक्षियों और जानवरों के पानी पीने के लिए चार पात्र रखे गए हैं।

अब यह कार्य जीवन का हिस्सा

भरत राजपुरोहित सिलोर ने बताया कि बाबा रामदेव के प्रति श्रद्धा से शुरू हुआ यह कार्य अब हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। कबूतरों को रोज दाना मिलता रहे और उनकी सेवा होती रहे, यही हमारे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।