पटवारी का फोन सुनकर जानकीलाल का बेटा अभिषेक भागा-भागा कलेक्टर कार्यालय पहुंचा. वहां सच में उनके पिता की मृत्य का सर्टिफिकेट देकर अनुग्रह राशि के लिए आवेदन दिया गया था। आवेदन में अभिषेक के पिता जानकीलाल की कोविड रिपोर्ट के साथ ही नगर निगम की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र भी लगाया गया था। इतना ही नहीं अभिषेक का आधार कार्ड, बैंक पासबुक भी इस आवेदन के साथ जमा थे। जैसे ही, साजिश के बारे में पता चला तो खुद जानकीलाल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और बताया कि, वो तो जिंदा हैं। फिलहाल, अपर कलेक्टर पवन जैन ने मामले की जांच का आदेश दिया हैं। साथ ही, कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि जाना जा सके कि, दस्तावेज जमा करने कौन आया था।