एक अनुमान के मुताबिक हर साल इंदौर में ऐसे 40-50 मामले सामने आते हैं, जिनमें या तो नवजात को झाड़ियों, कचरे या सुनसान स्थान पर फैंक दिया जाता है। PCPNDT विभाग द्वारा हर सरकारी, प्राइवेट अस्पताल, सोनोग्राफी सेंटरों से नियमित रिपोर्ट मंगाने, मशीनों में ट्रेकर लगाने के साथ मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके चलते अबॉर्शन के मामले लगभग बंद हो चुके हैं। सिर्फ खास ममलों में ही हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसकी अनुमति मिलती है। लेकिन, जानकारों का कहना है कि, लिव इन के मामलों के चलते ऐसे मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।