
Doctors on strike
जबलपुर. जांच व इलाज कराने पहुंचे मरीज गुरुवार को सुबह मेडिकल अस्पताल और जिला अस्पताल में भटकते रहे। ओपीडी खुली, लेकिन ज्यादातर विभागों में टेबल-कुर्सी खाली थे। रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय में भी ऐसा ही नजारा था। सभी डॉक्टर 31 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
मेडिकल से लेकर जिला अस्पताल तक स्वास्थ्य सेवाएं हुईं प्रभावित
डॉक्टर दो घंटे हड़ताल पर थे। हालांकि कुछ विभागों में जूनियर डॉक्टर व्यवस्थाएं संभालते दिखे। सीनियर डॉक्टरों के इस दौरान ड्यूटी पर नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं ठप नजर आईं। डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डीन कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन किया।
करना पड़ा इंतजार
मरीजों को इलाज के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर जैसे ही ड्यूटी पर वापस लौटे, जांच कराने और इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल के सभी ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई। वार्डों में भर्ती मरीज भी उनका इंतजार कर रहे थे। हड़ताल के दौरान केवल इमरजेंसी सर्जरी की गईं। हड़ताल समाप्त होने के बाद डॉक्टरों ने अपनी ड्यूटी की। रुटीन सर्जरी भी की गईं।
डॉक्टरों की ये है मांग
शासकीय अस्पतालों में सेवारत जबलपुर समेत प्रदेशभर के डॉक्टर मांग कर रहे हैं कि उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार उनके वेतन का निर्धारण किया जाए। स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एनएचएम अथवा अन्य मद में कार्यरत संविदा चिकित्सकों को नियमित किया जाए। पिछले वर्षों की तरह विभाग में सभी तकनीकी पदों पर केवल चिकित्सकों को पदस्थ किया जाए। सभी पदों की गरिमा के अनुरूप उनके कर्तव्य व अधिकारों का निर्धारण हो। मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन व शासकीय चिकित्सकों ने मांगों में कहा कि जनसंख्या के अनुपात में डब्ल्यूएचओ के मापदंडों के अनुरूप चिकित्सा संस्थानों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने व मौजूद बिस्तर की संख्या के आधार पर चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई जाए।
कमेटी के आश्वासन पर नहीं माने, आज से हड़ताल पर डॉक्टर
प्रदेश में करीब 13 हजार सरकारी डॉक्टर प्रदेश में डीएसीपी लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार से हड़ताल पर रहेंगे। गुरुवार को मप्र शासकीय/स्वशासी चिकित्सक महासंघ के पदाधिकारियों ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, हेल्थ कमिश्नर सुदाम खाड़े और कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन जॉन ङ्क्षकग्सले के साथ बैठक की। इसमें मंत्री ने डीएसीपी को लेकर कमेटी बनाने की बात कही, तो डॉक्टरों ने मना कर दिया। इधर, महासंघ का कहना है, हड़ताल को तीन हजार जूडा और 3500 संविदा डॉक्टरों का भी समर्थन है। इस बीच विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा डॉक्टर्स को तैनात करने की योजना बनाई, लेकिन महासंघ ने उनके भी समर्थन का दावा किया है।
Updated on:
17 Feb 2023 11:15 am
Published on:
17 Feb 2023 11:15 am
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