
Lineman hanging over 22 feet high electricity pole
जबलपुर। मोबाइल फोन पर वीडियो बनाने की लोगों की दीवानगी में मंगलवार को एक आदमी की जान-जाते-जाते बची। सिविक सेंटर में बिजली का कार्य कर रहे एक श्रमिक को पोल पर चढऩे के बाद करंट लग गया। वह करीब 22 फीट ऊँचे पोल पर आधे घंटे तक लटका रहा। करंट लगने से उसकी चीख निकल गई। वह अपनी जान बचाने के लिए आवाज देता रहा। लेकिन तमाशबीनों की भीड़ उसे पोल से उतारने के उपाय करने की बजाय मौत से जूझ रहे लाइनमैन का वीडियो बनाती रही। खैरियत ये रही कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने सजगता दिखाई और उनके द्वारा बिजली कंपनी को सूचना देने पर बिजली सप्लाई रोक दी गई। इन सबमें जो सबसे हैरानी वाली बात है वो ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली स्टेट-अप कंपनी श्रमिकों को सुरक्षात्मक उपकरण तक उपलब्ध नहीं करा रही है। इससे नंगे पैर और हाथों से काम कर रहे बिजली श्रमिकों की जिंदगी में हर पल मौत का खतरा मंडरा रहा है।
आम्र्ड केबल खींचते समय घटना
जानकारी के अनुसार मंडला मानेगांव निवासी नरेश स्टेपअप कम्पनी में ठेका श्रमिक है। पश्चिम सम्भाग अंतर्गत आरएपीडीआरपी का काम चल रहा है। नरेश दूसरे श्रमिकों के साथ मंगलवार को सिविक सेंटर स्थित जेडीए से चौपाटी मार्ग पर पोल पर चढ़कर केबल बिछा रहा था। शाम 5.30 बजे के लगभग दो श्रमिक जेडीए कार्यालय के सामने मढ़ाताल पोस्ट ऑफिस के कार्नर पर चढ़े हुए थे। आम्र्ड केबल खींचते समय चौपाटी वाले मार्ग के पोल की सप्लाई लाइन चालू हो गयी। करंट का झटका लगते ही नरेश जोर से चीख पड़ा। पोल के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।
ऐसे बची जान
बिजली के पोल पर खड़े श्रमिक के चिल्लाने की जैसे ही आवाज गूंजी लोग खंबे की ओर दौड़े। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इस दौरान पोल पर चढ़े नरेश ने फुर्ती दिखाते हुए अपना पैर पोल की बजाय आम्र्ड केबल पर रख दिया। और दूसरी केबल के सहारे खड़ा हो गया। वह इस मुद्रा में लगभग आधे घंटे तक पोल पर ही लटका रहा। इस दौरान नीचे जमा लोगों की भीड़ में अधिकर लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय उसका वीडियो बनाने में व्यस्त रहे।
फोन लगाकर बंद करायी सप्लाई
घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता आईके त्रिपाठी को फोन लगाकर घटना की सूचना दी और सप्लाई बंद कराने को कहा। इसके बाद पश्चिम सम्भाग वाले आधे क्षेत्र की बिजली कट की गई। तब जाकर नरेश नीचे उतर पाया। घटना की सूचना पाकर ओमती थाने की पुलिस भी पहुंची थी। बाद में पुलिस कर्मी नरेश को विक्टोरिया अस्पताल ले गए। जहां, हादसे से घबराया श्रमिक काफी देर तक बदहवास स्थिति में कुछ बोल तक नहीं पा रहा था।
113 करोड़ रुपए का ठेका
बताया जा रहा है कि स्टेट अप कंपनी ने करीब 113 करोड़ रुपए का ठेका हासिल किया है। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि करोड़ों रुपए का ठेका लेने वाली कंपनी के कर्मचारियों के पास पोल पर चढऩे-उतरने की सीढ़ी तक है। कंपनी ने श्रमिकों को किसी तरह का सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराया है। हादसे के वक्त भी श्रमिक के पास कोई सुरक्षात्मक उपकरण नहीं थे। स्टेट-अप कंपनी की मनमानी के चलते श्रमिक बिना जूता, दस्ताना, झूला और बिना सीढ़ी के २२ फीट ऊंचे पोल पर चढ़कर काम करने को मजबूर हैं। हादसे के बाद देर तक श्रमिक नरेश बदहवास सी हालत में रहा।
Published on:
20 Mar 2018, 9:11 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.