
Chief Election Commissioner- मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस नेता विवेक तन्खा का बड़ा बयान। (फोटो विवेक तन्खा एफबी)
Chief Election Commissioner- मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमिशन और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस पर मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि अब बहुत हो चुका है, अब प्रजातंत्र को बचाने के लिए हम सब संविधान की रक्षा करेंगे। हम केस भी नहीं लड़ेंगे। जनता भी उतर आई है।
मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा आइएएनएस से बात कर रहे थे। सीनियर वकील एवं कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने कहा कि कोर्ट ने इनकार कुछ नहीं किया है, कोर्ट ने नोटिश इश्यू किया है। उन्होंने कहा है कि हम जो भी निर्णय लेंगे, वो दोनों पक्षों को सुनकर लेंगे, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। एक बहुत बड़ा मुद्दा कोर्ट के सामने आया है, उसी गंभीरता से कोर्ट ने लिया है, उसी गंभीरता से तीनों इलेक्शन कमिशनर्स को नोटिस दिए हैं। उसी गंभीरता से वे रिकार्ड चेक करेंगे। कैसे फॉर्म 6 में तब्दीलियां हुई, कैसे उनका मिसयूज हुआ है। कैसे फॉर्म 7 के माध्यम से एक राजनीतिक दल बल्क वोट डिलीट करवा रही है और यह पूरे देश में हो रहा है, लाखों-करोड़ में है। क्या हो रहा है देश में। आपने प्रजातंत्र की आत्मा हटा दी है। यह बहुत बड़ा मुद्दा है, अब तो जनता की अदालत में भी पहुंच गया है। पूरे देश में आंदोलन हो रहा है, इसमें आप देखना सुखद रिजल्ट आएगा।
विवेक तन्खा ने कहा कि "जज साहब NALSAR में आधिकारिक हैसियत से नहीं बोल रहे थे क्योंकि उस समय वे किसी बेंच की अध्यक्षता नहीं कर रहे थे। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त की। लेकिन यह सिर्फ उनकी भावना नहीं थी, यह करोड़ों लोगों की भावनाएं थीं। पूरे देश में यही भावनाएं हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
विवेक तन्खा ने कहा कि "युवा, राजनीतिक पार्टियां और आम लोग - सभी सड़कों पर उतर आए हैं। अब BJP के लिए यह स्थिति संभालना मुश्किल हो गया है। लंबे समय से पर्दे के पीछे जो हेर-फेर चल रही थी, वह अब सबके सामने आ गई है। और जिस तरह से उन्होंने यह पूरी गड़बड़ी की, वह अब बर्दाश्त के बाहर हो गया है। लोकतंत्र को बचाना ही अब देश का एकमात्र मकसद और विकल्प है।"
विवेक तन्खा कहते हैं, "हम भी जाएंगे। हमने कल भी कहा था कि हम केस नहीं लड़ेंगे। हर कोई अपना काम छोड़कर लोकतंत्र को बचाने के लिए बाहर आया है। आपने देखा कि परसों कपिल सिबल कैसे सड़कों पर चल रहे थे। अब सीनियर वकील और जूनियर वकील के बीच कोई फ़र्क नहीं है। लोकतंत्र को बचाने के लिए हम सभी संविधान के सिपाही हैं।"
Updated on:
05 Oct 2026 04:24 pm
Published on:
05 Oct 2026 04:14 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
