
जयपुर . आर्थिक तंगी का हवाला देकर शहरवासियों की जरूरत को दरकिनार करने वाला जेडीए सरकार को खुश करने के लिए रोकड़ लुटाएगा। राजधानी की मुख्य सड़कों और उद्यानों में ब्यूटिफिकेशन का काम होगा। इसमें केवल उन मुख्य सड़कों को शामिल किया है, जिनसे वीआईपी आवाजाही होती है। इस काम पर करीब 18 से 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जवाहर सर्किल, जेएलएन मार्ग पर काम शुरू कर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इस काम के लिए भी निजी कंसलटेंट नियुक्त किया है। जबकि, जेडीए में ही उद्यानिकी शाखा और अभियांत्रिकी शाखा में इन कंसलटेंट से ज्यादा बेहतर अफसर काम कर रहे हैं। इसके बावजूद कंसलटेंट के नाम पर भी लाखों रुपए लुटाए जा रहे हैं। ठेके के आड़ में जेब भरने का भी खेल चल रहा है।
-3.30 करोड़ रुपए एयरपोर्ट रोड टर्मिनल 2 से जवाहर सर्किल, जेएलएन मार्ग से रामनिवास बाग तक
-2.17 करोड़ रुपए जगतपुरा रोड-जवाहर सर्किल से बालाजी मोड, जगतपुरा फ्लाईओवर से अपेक्स सर्किल में लैण्डस्केपिंग कार्य
-1.98 करोड़ रुपए रामनिवास बाग में लैण्डस्केपिंग कार्य
- गांधी सर्किल से अपेक्स सर्किल में लैण्डस्केपिंग कार्य (निविदा प्रक्रिया में है)
-1.81 करोड़ रुपए नेहरू बालोद्यान में लैण्डस्केपिंग रामनिवास बाग में लैण्डस्केपिंग कार्य
-3.48 करोड़ रुपए सेन्ट्रल पार्क में लैण्डस्केपिंग काम
-01 करोड़ रुपए बिड़ला मंदिर से रामबाग सर्किल, यहां से सिविल लाइन्स, विधानसभा से स्टेच्यू सर्किल, गांधी सर्किल से टोंक रोड
-विद्याधर नगर अलका सिनेमा से स्वर्ण जयंती गार्डन तक (निविदा प्रक्रिया में है)
-इसमें उद्यानिकी व सिविल दोनों कार्य शामिल है।
कुछ मूलभूत सुविधाएं लंबित व कुछ निरस्त
तिजोरी में पैसा नहीं होने का हवाला देते हुए जेडीए प्रशासन ने कई सुविधाओं के प्रस्ताव को लंबित कर दिया तो कइयों को निरस्त कर दिया। हाल ही कार्यकारी समिति की बैठक में सड़क सुविधा से जुड़े प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया। इसमें आगरा रोड पर कानोता, बस्सी व आस-पास के इलाकों में सड़क निर्माण किया जाना था। लेकिन निविदा की मियाद खत्म होने का हवाला देते हुए निरस्त कर दिया गया। ऐसे ही कई प्रस्ताव और भी शामिल हैं। जेडीए ने 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन ले रखा है।
सवाल: जेडीए 100 का, ठेकेदार 28 रुपए में तैयार
ठेकेदार इस काम को करने के लिए 72 प्रतिशत कम दर पर तैयार हो गए। यानी जिस काम की लागत का निर्धारण जेडीए ने 100 रुपए किया, उसे ठेकेदार 28 रुपए ही करने को राजी हैं। निविदा में न्यूनतम दर बीएसआर दर से 72 फीसदी से भी कम प्राप्त हुई है। सभी कार्यों में ऐसी ही स्थिति है। इससे सवाल उठ रहा है? कि आखिर ठेकेदार इतनी कम दर में काम कैसे कर लेंगे? सवाल यह उठ रहा है कि या तो जेडीए अफसरों ने मनमाने तरीके से आकलन किया या फिर इस दर पर काम करने से गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा।
Published on:
24 Feb 2018, 3:23 PM IST
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