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#4_साल_सूरत_ए_हाल: अब तो कोर्ट से भी हो रही फजीहत, चेत जाओ, नहीं तो पब्लिक चेता देगी!

भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण देने का कानून बनाने के लिए हाथ बढ़ाकर जहां जनता से बैर मोल लिया तो कोर्ट भी जनता के साथ खड़ा नजर आया...
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जयपुर

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Dinesh Saini

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Updated: 13 Dec 2017, 11:30 AM IST

High Court

जयपुर। सरकार चार साल से अपने कदम जैसे-जैसे अपने कार्यकाल के आखिरी साल की ओर बढ़ा रही है, लगता है कोर्ट आईने की तरह उसे टिप्पणियों से चेताने का प्रयास कर रहा है। इस साल औसतन हर दूसरे माह राज्य सरकार को कोर्ट की ऐसी तल्ख टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। चार साल का सफर देखें तो कई दर्जन बार ऐसे मौके आए, जब हाईकोर्ट को सरकार को फटकार लगानी पड़ी। बीते महीने तो सुप्रीम कोर्ट तक ने बोला सरकार खुद तो कुछ करती नहीं, हाईकोर्ट सुधार करे तो भी आपत्ति। जयपुर सहित प्रदेश के छह बड़े शहरों का मास्टर प्लान ऐसा मुद्दा रहा जिसको लेकर सरकार जनहित के नाम गली निकालती पर कोर्ट शहरों का नक्शा बिगडऩे से रोकने के लिए सख्त हेडमास्टर की भूमिका में खड़ा नजर आता रहा। भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण देने का कानून बनाने के लिए हाथ बढ़ाकर जहां जनता से बैर मोल लिया तो कोर्ट भी जनता के साथ खड़ा नजर आया। सरकार अगर जनता के बीच रहना है तो जनता के दु:ख दर्द समझकर उन पर मरहम लगाना ही होगा। आइए जानते हैं सरकार को कब-कब हाई कोर्ट ने लगाई फटकार...


1 अक्टूबर 2015 - नाकारा हो चुकी सरकार
2015 में हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि सरकार नाकारा हो चुकी है, वजह रही आयोगों के खाली पदों को भरने की सरकार ने मंशा ही नहीं दिखाई। इस हालात को कोर्ट को कहना पड़ा कि सरकार गंभीर नजर नहीं आई तो सीएस को खड़ा रखना पडेगा।

7 अक्टूबर 2015 - यह तो सरकार की अंधी कार्यप्रणाली है
तबादलों में अधिकारियों की मनमानी की, तो हाईकोर्ट को यहां भी कहना पड़ा कि सरकार की कार्यप्रणाली अंधी नजर आ रही है । कोर्ट ने अधिकारियों को तबादलों में मनमानी रोकने के लिए संदेश दिया कि कोर्ट अधिकारियों से फिजूल खर्च होने वाले टीए डीए की वसूली करवा सकता है । सरकार के साल दर साल बीतते गए, पर आयोगों में खाली पद हाईकोर्ट के 2015 से बार-बार कहने के बावजूद नहीं भर पाए हैं।

22 सितम्बर 2016 - चेत जाओ, नहीं तो पब्लिक चेता देगी
जोधपुर में आए दिन फायरिंग की घटनाएं सामने आईं तो हाईकोर्ट का भी गुस्सा बरसता नजर आया। हाईकोर्ट न्यायाधीश को सुनवाई के दौरान कहना पड़ा कि वे पुलिस कमिश्नर होते तो तुरन्त इस्तीफा दे देते। सरकार को चेतावनी दी कि या तो वह खुद चेत जाए नहीं तो आने वाले दिनों में जनता चेताने में देर नहीं लगाएगी। हाईकोर्ट ने अपनी चिंता जाहिर करने के लिए कई मौकों पर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया, पर इनमें से भी कुछ मामलों में अधिकारियों से ज्यादा कोर्ट ही चिंतित नजर आया। हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई और शनिवार को अवकाश के दिन भी बुलाया।


1 नवम्बर 2017 - माउंट आबू बर्बाद हो गया, सरकार ने बिल्डऱों को सौंप दिया
माउंट आबू के हालात बिगडऩे पर कोर्ट ने टिप्पणी की तो जयपुर में सत्तापक्ष के प्रदेशाध्यक्ष ने पार्क को ही मिटा देने की सलाह दे डाली । मास्टर प्लान पर तो ऐसा लगता रहा कि कोर्ट शहरों की बदहाली रोकने को गंभीरता दिखा रहा और सरकारी नुमाईंदे बचने के लिए मास्टर प्लान बनाता नजर आया । इस पर हाईकोर्ट को सख्त संदेश देना पड़ा कि लगता है दो-चार को जेल नहीं भेजेंगे, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे ।


अब सरकार को जनता के बीच फिर से जाने के लिए एक साल ही बचा है सरकार ने खुद की चाल-ढाल नहीं बदली तो कोर्ट का रास्ता दिखाना भी सरकार को जनता की नजरों में बने रहने के लिए काम नहीं आएगा। उम्मीद है सरकार आखिरी साल में जनता के लिए लुभावने नहीं, बल्कि विकास के लिए आगे बढऩे का संकल्प पेश करेगी।