
जयपुर। प्रदेशाध्यक्ष को लेकर भाजपा में चल रही खींचतान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रविवार को राज्य के कुछ अहम विधायकों से दिल्ली में मिले। शाह ने उनसे राजनीतिक हालात और जातिगत समीकरण के बारे में राय जानी। साथ ही नए प्रदेशाध्यक्ष के चयन को लेकर उनसे चर्चा भी की। विधायकों में जाट और राजपूत दोनों समुदायों के विधायक शामिल थे। इन विधायकों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी एकजुटता दिखाई। इस बीच राज्य में मंत्रिमंडल में बदलाव की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। प्रदेशाध्यक्ष पद से अशोक परनामी का इस्तीफा लेने के बाद अब सबकी निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं।
प्रदेशाध्यक्ष को लेकर जातिगत चक्रव्यूह में उलझी भाजपा कैबिनेट में फेरबदल पर भी विचार कर रही है। फेरबदल की मदद से जातीय समीकरण और असंतुष्टों को साधने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। संगठन से हटाए गए चेहरों को सरकार में शामिल करने के साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मंत्रियों की छुट्टी करने पर मंथन किया जा रहा है। कुछ समय पूर्व भी मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार की पहल की थी, केन्द्रीय नेतृत्व इसके लिए राजी नहीं हुआ था।
आंदोलन के नुकसान की भरपाई का प्रयास
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक साल से प्रदेश सरकार के कामकाज पर नजर रख रहा है। वहीं पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी लगातार प्रदेश सरकार की योजनाओं की समीक्षा कर रहा है। संघ और पार्टी की रिपोर्ट लगभग एक जैसी है। इसलिए राज्य सरकार की छवि दुरुस्त करने के प्रयास शुरू किए गए हैं। वहीं दलित वर्ग के आंदोलन को लेकर जो नकारात्मक माहौल बना है उसे भी उन्हें मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाकर साधने पर विचार किया जा रहा है।
Published on:
23 Apr 2018 09:36 am
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