
जयपुर . गांधी नगर स्थित बालिका सुधार गृह में गुरुवार सुबह करीब सवा छह बजे सुरक्षा कर्मियों की आंखों के सामने छह किशोरी गेट फांदकर भाग गई। किशोरियों के भागने में बालिका सुधार गृह प्रशासन की लापरवाही साफ झलक रही है। घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई। जिसमें पुरुष और महिला गार्ड आराम से बालिकाओं को गेट फांदते देख रहे हैं। लेकिन उनका विरोध नहीं किया। जबकि एक महिला गार्ड ने विरोध करने पर किशोरियों द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया है। सूचना पर पहुंची बजाज नगर थाना पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद जगतपुरा रेलवे स्टेशन से तीन किशोरियों को पकड़ लिया है। जबकि तीन किशोरियों की तलाश जारी है।
तीन महिला गार्ड, एक से चाबी छिन गेट खोला
सुधार गृह में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए तीन महिला गार्ड अंदर तैनात रहती हैं। एक महिला गार्ड लड़कियों के भागने से पांच मिनट पहले गुरुवार सुबह 6.05 बजे घर के लिए निकली थी, जबकि दूसरी बाथरूम में थी और 8 लड़कियों ने अकेली तीसरी महिला गार्ड से मारपीट कर गेट की चाबी ले ली। बाहर आने के बाद पहले दीवार की तरफ गईं, लेकिन बाद में छह लड़कियां गेट फांदकर भाग गईं। जबकि दो लड़कियां भागने में विफल रही।
17 से 18 वर्ष के बीच है उम्र
सुधार गृह से भागने वाली सभी लड़कियां नाबालिग हैं। हालांकि साल डेढ़ साल से यहां बंद थी। इन लड़कियों की उम्र 17 और 18 वर्ष के बीच की हैं और सभी लड़कियों को अलग-अलग घटना में युवकों द्वारा घर बहला फुसलाकर भगाने के मामले पकड़ी गईं थीं। बाद में न्यायालय ने उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया था, जबकि आरोपित युवकों को जेल भेज दिया था।
एक दिन पहले अधीक्षक ने की थी सख्ती
बालिका सुधार गृह सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पहले यहां नई अधीक्षक ने चार्ज संभाला था। इसके बाद किशोरियों पर सख्ती कर दी गई। होबी क्लासेज बंद कर दी गई। रहने वाले कमरों को बदल दिया गया। कुछ अन्य पाबंदी लगा दी गई। इसी बात को लेकर किशोरियों की बुधवार रात को संबंधित महिला अधिकारियों से कहासुनी भी हुई। इसके बाद लड़कियों के भागने की आशंका बुधवार रात्रि को ही लग गई थी। लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा में कोताही बरती गई।
अधीक्षक रहेंगी तो हम नहीं
पुलिस ने जिन लड़कियों को पकड़ा है, उनमें दो जयपुर की और एक सीकर की हैं। जबकि फरार तीन लड़कियां सीकर और झुंझनूं की रहने वाली हैं। सुधार गृह सूत्रों के मुताबिक, पकड़ी गई लड़कियों ने पूछताछ में बताया है कि जब तक यह अधीक्षक यहां रहेंगी, तब तक हम यहां नहीं रहेंगे। इसके बाद तीनों बालिकाओं को अन्य सुधार गृह में शिफ्ट कर दिया गया।
Published on:
26 Apr 2018 08:39 pm
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