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Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: स्मृति में…राजस्थान की धड़कनों में कुलिशजी, मार्गदर्शन से हमें देशभर में सराहना मिली

Karpoor Chandra Kulish: कर्पूर चंद्र कुलिश की जन्म शताब्दी वर्ष...पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश के जन्मशती वर्ष की शुरुआत 20 मार्च, 2025 से हो गई है। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता की मशाल थामे कुलिश जी ने अपने अग्रलेखों, आलेखों में लोकतंत्र की मजबूती पर जोर दिया।

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जयपुर

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Arvind Rao

Mar 28, 2026

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: जयपुर: एक व दो दिसंबर 1979 को जयपुर में अखिल भारतीय परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। इसकी स्वागत समिति के अध्यक्ष श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिशजी और डॉ. महेश चन्द्र शर्मा संयोजक थे।

स्वागताध्यक्ष का पद सामान्यतः औपचारिक माना जाता है, फिर भी कुलिशजी सुबह से रात तक अनेक दिनों तक डॉ. शर्मा के साथ सक्रिय रहे। इससे अधिवेशन यशस्वी और भव्य बना तथा राजस्थान को देश भर के प्रतिनिधियों से सराहना मिली।

इस दौरान लगभग एक महीने तक उनका सान्निध्य मिला और चांदपोल स्थित हाथी भाटा निवास पर मार्गदर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। तब मैं विधि में अंतिम वर्ष का विद्यार्थी था।

कुलिशजी उस समय भी सर्वाधिक लोकप्रिय राजस्थान पत्रिका के संस्थापक संपादक और ऊंची सामाजिक प्रतिष्ठा के बावजूद अत्यंत सहज, आत्मीय और निरभिमानी रहे। उनका सान्निध्य 46 वर्ष बाद भी मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत और सभी के लिए प्रेरणा है।
प्रेषकः रामपाल जाट, राष्ट्रीय अध्यक्ष (किसान महापंचायत)


…काव्यांजलि…

कर्पूर चन्द्र कुलिशजी हैं, जन-जन की आवाज
पत्रकारिता के जनक का, कोई न सानी आज।।
जिया संघर्षमय जीवन और इसी में पले बढ़े
निडर बेखौफ पत्रकारिता में नूतन आयाम गढ़े।।
जन-जागरण के केंद्र बने थे, कुलिशजी के लेख
रोज पत्रिका में छपता था ज्वलंत मुद्दा एक।।
जब तानाशाही गइ चरम पर, संकट का था दौर
आपातकाल में हुआ जब मीडिया मौन चहुंओर
पत्रकारिता पर लगाए जब सत्ता ने प्रतिबंध।।
रुके नहीं तब कुलिशजी लेख लिखे स्वछंद
झुके नहीं सत्ता के आगे, पदचापी से दूर
पदचापी से देश और दुनियां में छाए, हुए खूब मशहूर।।
पत्रकारिता में पाएं हैं आपने कई बड़े सम्मान, कई पुस्तकें भी लिखीं
बने वेदों के विद्वान। आज भी राजस्थान पत्रिका, बना हुआ है सिरमोर।
पाठकों के मन में उठती है, उत्साह भरी हिलोर।।
खबर सत्यता से परिपूर्ण, सबका है विश्वास
दुर्गम स्थानों में भी पहुंचता पत्रिका सबके पास।।

-सोनू सुरीला, बारां

जब मरुधरा की रेत में सन्नाटा गहरा था
जब सच कहने का साहस भी ठहरा-ठहरा था
तब एक स्वर उठा, निर्भीक, अडिग और उजियारा
जिसने पत्रकारिता को दिया नया सितारा।।
वह थे कुलिशजी-साधारण जीवन, विचार महान
जनता के दुख-दर्द से जुड़ा जिनका था मान न पद की चाह
न यश का अभिमान, बस सच की राह ही कुलिशजी का था अभियान।।
अन्याय के अंधेरों से जब दुनिया घबराती थी
तब कुलिश जी की लेखनी मशाल बन जाती थी
एक छोटा सा स्वप्न था, पर हौसला बड़ा था
मरुधरा की धरती पर विश्वास का पौधा खड़ा था।।
वही स्वप्न आगे वटवृक्ष बन गया
राजस्थान पत्रिका जन-जन का विश्वास बन गया
पत्रिका केवल अखबार नहीं, जनभावना की धड़कन है
हर पीड़ित की आवाज और समाज का दर्पण है।।
हर पन्ने में सच की खुशबू बसती है
हर शब्द में साहस की ज्योति जलती है
जब सत्ता के गलियारों में खामोशी छा जाती है
तब पत्रिका की निर्भीक कलम ही सच कह जाती है।।
जनता के अधिकारों की रक्षा का जो प्रण कुलिशजी ने लिया
उसे हर दिन, हर पन्ने पर सच्चाई से जिया
पत्रकारिता को कुलिश जी ने केवल पेशा नहीं माना
उसे समाज सेवा का सबसे पावन साधन जाना।।
-संगीता कलंत्री, चित्तौड़गढ़

सौ वर्षों का यह उजाला सफर, गौरव और सम्मान है
श्रद्धेय कुलिशजी के स्नेह और आशीष से, हर दिन आज धनवान है।।
संघर्षों में भी मुस्कान रखी, हर राह को आसान किया
आपने अपने जीवन से जीने का अर्थ सिखा दिया।।
आपका आशीर्वाद यूं ही रहे, हर पीढ़ी का अभिमान बने
कुलिशजी की यह शताब्दी गाथा सदा हमारा सम्मान बने।।
-मित्रा सुराणा, मुंबई