
राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस एक बार फिर चुनावी मोड पर हैं। इसी वर्ष प्रस्तावित लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियों को रफ़्तार देना शुरू कर दिया है। भाजपा जहां 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के ज़रिए इस मिशन में जीत पाने को लेकर जुटी दिख रही है, तो वहीं कांग्रेस भी नई रणनीति के ज़रिये लोकसभा चुनाव में अब तक रही खराब परफॉर्मेंस को सुधरने पर ज़ोर लगा रही है।
शहर से गांव तक मंत्री करेंगे कैंप
भाजपा में लोकसभा चुनाव की तैयारी में संगठन से लेकर राज्य सरकार तक जुटी हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी मंत्रियों को राजधानी जयपुर से लेकर गांवों तक कैंप करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी मंत्री जयपुर में दो दिन और अपने-अपने क्षेत्रों में शेष रहे चार दिन तक कैंप करेंगे। इस दौरान जनसुनवाई में आमजन की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करने के प्रयास होंगे।
मुख्यमंत्री के मंत्रियों को निर्देश हालांकि राज्य सरकार के नियमित कामकाज से जुड़े हैं, लेकिन शहरों से लेकर गाँवों तक पहुंचकर लोगों से होने जा रहे इन संवाद कार्यक्रमों को भी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इन कैंपों में सभी मंत्री लोगों के बीच जाकर केंद्र और राज्य में बनी 'डबल इंजन' सरकार का प्रचार भी करेंगे।
पीएम मोदी कर रहे अगुवाई
राजस्थान सहित देश भर के अन्य राज्यों में जारी 'मिशन लोकसभा चुनाव' की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कर रहे हैं। चुनाव से ऐन पहले शुरू हुए 'विकसित भारत संकल्प' कार्यक्रम के ज़रिये प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न वर्गों के लोगों से वर्चुअल संवाद कर रहे हैं। इस संवाद कार्यक्रम के अलावा भी कई अन्य कार्यक्रमों के ज़रिये केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं आका ज़बरदस्त प्रचार हो रहा है।
कांग्रेस कॉर्डिनेटर्स पर बड़ा दारोमदार
कांग्रेस पार्टी ने अपनी लोकसभा चुनाव तैयारियों के तहत सभी 25 सीटों पर कोऑर्डिनेटर तैनात कर दिए हैं। ये कॉर्डिनेटर्स अपने-अपने प्रभार वाले लोकसभा क्षेत्रों में जाकर पार्टी प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी करेंगे। वहीं प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की अध्यक्षता में प्रदेश चुनाव समिति का गठन किया है, जिसमें पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट से लेकर काइआ वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है।
भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस की चुनौती
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राजस्थान की कुल 25 सीटों में से 24 सीटें जीतकर कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ कर दिया था। एक सीट भाजपा के ही सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खाते में गई थी। इससे पूर्व हुए चुनावों में भी कांग्रेस की परफॉर्मेंस लगातार बिगड़ती रही है। ऐसे में इस बार के चुनाव में ज़्यादा से ज़्यादा सीट पर जीत हासिल करने की चुनौती भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस की रहेगी।
Published on:
08 Jan 2024 10:44 am
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