एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर सुधीर मेहता ने बताया कि डेंगू के 4 स्ट्रेन होते हैं। इन चारों स्ट्रेन में डी 2 ही सबसे घातक होता है। बाकी तीनों स्ट्रेन से होने वाला फीवर सामान्य डेंगू फीवर होता है और उनका कॉम्प्लिकेशन रेट भी कम होता है। जबकि डी2 स्ट्रेन में कॉम्प्लिकेशन रेट ज्यादा होती है। इसमें तेज बुखार आता है, पेट दर्द, उल्टी होती है। इस स्ट्रेन में डेंगू शॉक सिंड्रोम और डेंगू हेमेरिजक फीवर देखने को मिलता है। इन दिनों जो भी सैंपल सामने आ रहे हैं, उनमें डी 2 के केसेज सबसे ज्यादा हैं। साथ ही उनकी पॉजिटिविटी रेट भी ज्यादा हैं। ऐसे में उन्होंने पेशेंट्स को तुरन्त डॉक्टर्स की मदद लेने की हिदायत दी। उन्होंने बताया कि डेंगू की बीमारी का रिस्क जुलाई से अक्टूबर में बना रहता है। बारिश के बाद जलभराव की स्थिति होने के कारण भी मच्छर तेजी से पनपते हैं। इस कारण डेंगू और मच्छर जनित दूसरे रोग का रिस्क बढ़ता है। दूसरे स्ट्रेन की तुलना में डेंगू का डी 2 स्ट्रेन तेजी से फैलता है और प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरती है।