
ग्वालियर हाईकोर्ट की दतिया राज परिवार की संपत्तियों की खरीद- बिक्री पर रोक : image credit- patrika enhanced AI Grok
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने श्रीनाथ विहार आवासीय योजना की जमीन से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। डबल अलॉटमेंट के आरोपों के बीच कोर्ट ने संबंधित जमीन पर तीसरे पक्ष के पक्ष में किसी तरह का हक या अधिकार बनाने पर पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने आदेश देते हुए विवादित जमीन पर किसी भी तरह के थर्ड पार्टी राइट्स बनाने पर रोक लगा दी है। जस्टिस अनूप कुमार धंड की अदालत ने 2 सितंबर को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि नोटिस की तामील के बाद विवादित जमीन के संबंध में कोई तीसरे पक्ष का अधिकार सृजित नहीं किया जाए।
हालांकि, प्रतिवादियों को इस अंतरिम आदेश को हटाने के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। दरअसल, मामला राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व नाम पिंकसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड) की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने श्रीनाथ विहार से जुड़े जेडीए अपीलीय अधिकरण और उपायुक्त, जोन-11 के आदेशों को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि विवादित जमीन को पहले उसकी प्रस्तावित नारायण नरसी विलेज टाउनशिप के लिए जेडीए की प्रक्रिया में शामिल किया गया था। याचिका के मुताबिक, साल 2005 और 2006 में संबंधित जमीन के सरेंडर डीड जेडीए ने स्वीकार किए थे। इसके बाद मूल खातेदारों के अधिकार समाप्त होकर जमीन राज्य-जेडीए में निहित हो गई थी।
इसके बावजूद आरोप है कि बाद में इन्हीं जमीनों को श्रीनाथ विहार योजना में शामिल कर दिया गया। याचिका में खसरा नंबर 88, 90, 91, 99, 104 से 110, 112 से 114 और 127 सहित कई जमीनों का उल्लेख है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जेडीए ने एक ही जमीन को पहले नारायण नरसी विलेज और बाद में श्रीनाथ विहार की विकास प्रक्रिया में शामिल किया।
याचिकाकर्ता ने खातेदारों को किए गए भुगतान की रसीदें, बैंक रिकॉर्ड और अन्य डॉक्यूमेंट भी अदालत में पेश किए हैं। याचिका में एक मामले में 40.21 लाख रुपए और कुछ अन्य भूखंडों के संबंध में करीब 1.04 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान का दावा किया गया है। याचिका में कुछ जमीनों के एससी-एसटी खातेदारों से जुड़े होने का भी दावा करते हुए राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 के प्रावधानों का मुद्दा उठाया गया है।
श्रीनाथ विहार को लेकर 2025 में राजस्थान रेरा में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में करीब 70,200 वर्गमीटर यानी 28 बीघा में प्रस्तावित परियोजना के पूरा नहीं होने और रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट के लैप्स दिखने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने जांच, रेरा पंजीकरण निलंबित करने और परियोजना की राशि के फोरेंसिक ऑडिट की मांग की है। हालांकि, जमीन डबल अलॉटमेंट, भुगतान और अन्य अनियमितताओं से जुड़े ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत का अंतरिम आदेश केवल तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर रोक से संबंधित है।
Updated on:
11 Sept 2026 01:01 pm
Published on:
11 Sept 2026 01:01 pm
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