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राजपूत व जाट बिरादरी के दो नेताओं के पाले बदलने का अर्थ, धोरों की धरती पर नए सियासी समीकरण

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जयपुर

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Dinesh Saini

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Updated: 18 Oct 2018, 8:30 AM IST

Manvendra Singh

जयपुर/बाड़मेर। राजस्थान में बुधवार को भाजपा को दो बड़े झटके लगे। राजपूत और जाट बिरादरी से आने वाले दो नेताओं ने भाजपा का दामन छोडकऱ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की राह पकड़ ली। पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे manvendra singh भाजपा छोडऩे का ऐलान पहले ही कर चुके थे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi की मौजूदगी में भाई भूपेन्द्र सिंह और पत्नी चित्रा सिंह के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। वहीं, किसान नेता रामपाल जाट ने ‘आप’ की सदस्यता ले ली। वहीं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भाजपा का मजबूत चेहरा व कातोल क्षेत्र से विधायक रहे आशीष देशमुख को भी कांग्रेस ने अपने पाले में कर लिया।

राजस्थान में टिकट वितरण से पहले मानवेन्द्र के इस कदम ने पश्चिमी राजस्थान में सियासी हलचल बढ़ा दी है। इससे भाजपा-कांग्रेस के सियासी समीकरण बदलने के साथ ही मारवाड़ की राजनीति में राजपूत बहुल सीटों का गणित व प्रत्याशी चयन भी प्रभावित हो सकता है।

2014 के आम चुनाव में भाजपा की ओर से जसवंतसिंह का टिकट काट कांग्रेस से भाजपा में आए कर्नल सोनाराम चौधरी को बाड़़मेर संसदीय सीट से टिकट देने के दौरान जो खलबली मची थी, वैसी ही उठापटक मानवेन्द्र के कांग्रेस में आने से हुई है।

कांग्रेस पर यह असर
मानवेंद्र के साथ नाराज राजपूत पूरे राज्य में अब कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं। मारवाड में अल्पसंख्यक और दलित वोटर्स के लिए मानवेन्द्र सकारात्मक चेहरा है। कांग्रेस के लिए अब जाट मतदाताओं को पक्ष में रखना बड़ी चुनौती हो सकती है। हालांकि कांग्रेस नेता हरीश चौधरी व हेमाराम चौधरी के पक्ष में रहे जाट मतदाता साथ रह सकते हैं।

भाजपा पर यह असर
भाजपा के लिए फायदा जाटों का जुड़ाव हो सकता है। कर्नल सोनाराम के साथ आए जाट मतदाताओं का जुड़ाव और मजबूत हो सकता है। बाड़मेर में 2 अप्रेल की घटना से राजपूतों से खफा हुए दलितों का जातिगत आधार पर स्थानीय स्तर पर थोड़ा झुकाव भाजपा की ओर संभव है। राजपूत व रावणा राजपूतों के जाने से भाजपा को घाटा हो सकता है।

मारवाड़ में यह असर
बाड़मेर में पचपदरा और सिवाना, जालोर में भीनमाल, जोधपुर में सरदारपुरा, शेरगढ़, नागौर में खींवसर और जैसलमेर जैसे विधानसभा क्षेत्रों में इस राजनीतिक उठापटक से सियासी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। बताया जाता है कि मानवेन्द्र सेे सिवाना, जैसलमेर और खींवसर सीट पर प्रत्याशी चयन से पहले राय मशविरा हो सकता है।

रामपाल फैक्टर कितना करेगा प्रभावित
‘आप’ की सक्रियता शहरों में ज्यादा है। अब ग्रामीण क्षत्रों में आधार मजबूत होगा। भाजपा-कांग्रेस के लिए किसान और जाट अहम हैं। रामपाल सीधे तौर पर किसान महापंचायत से जुड़े किसानों को पार्टी में सक्रिय करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अब भाजपा-कांग्रेस को आप से चुनौती मिलने की स्थिति पैदा हो गई है।