सबकी मनोकामना होती है पूरी
पुजारी व पूर्व सरपंच हीरालाल गुर्जर बताते हैं कि इस दरबार में जो भी भक्त अपनी मन्नत लेकर उपस्थित होता, उनकी मनोकामना पूरी होती है। उनकी कृपा राजे खुद वर्ष 2003 व 2013 की यात्रा में देख चुकी हैं। 2003 में पहली बार वसुन्धरा राजे चारभुजा के दरबार आईं तथा सरकार की सफलता के लिए मन्नत मांगी। वह पूरी भी हुई। उनका मानना है कि राजे की चारभुजा के प्रति आस्था और प्रगाढ़ होती चली गई, जब 2013 के चुनावी समर में चारभुजानाथ ने उनके 'रथ' को आगे बढ़ाया। सनातन वैद्धिक शिक्षण संस्थान, कसार के पं. उमेश द्विवेदी ने बताया कि राजे का वैदिक परम्परा में भरोसा है और साक्षात् नारायण श्री चारभुजाजी के प्रति अटूट निष्ठा है। यही उत्तम फल प्राप्ति का कारण है। चारभुजा से यात्रा शुरू होना, पूरे मेवाड़ के लिए गौरवशाली क्षण है।