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आखिर क्यों वसुंधरा राजे राजस्थान में यहीं से करती हैं चुनावी सफर का आगाज….?

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जयपुर

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Nidhi Mishra

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Updated: 29 Jul 2018, 4:34 PM IST

Rajasthan election 2018- Why CM Raje Yatra to start from Charbhuja

Rajasthan election 2018- Why CM Raje Yatra to start from Charbhuja

चारभुजा/ राजसमंद। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सूबे में अपने चुनावी प्रचार का आगाज चारभुजानाथ के दरबार से करनी वाली हैं। यह उनकी तीसरी यात्रा है। सुराज गौरव यात्रा राजस्थान में सत्तासीन सरकारों की हार का मिथक इस बार टूटने की उम्मीदों से लबरेज है।


वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने परिवर्तन यात्रा लेकर निकलीं वसुंधरा राजे को 122 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत से सत्तासुख मिला। 2008 के चुनावों में गहलोत फिर मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठे। पांच साल बाद वर्ष 2013 में राजे फिर चारभुजानाथ के दरबार पहुंचीं और उन्होंने राज्यव्यापी सुराज संकल्प यात्रा का आगाज यहीं से किया। नतीजा यह रहा कि 166 सीटों के साथ प्रचण्ड बहुमत से वह सत्ता में आईं।


अटूट श्रद्धा व आस्था
मेवाड़ के चार धामों में से प्रमुख चारभुजानाथ के प्रति मेवाड़ ही नहीं, मारवाड़ और मालवा के लाखों लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था है। माना जाता है कि चारभुजानाथ मन्नतें पूरी करते हैं और प्रभु के प्रति वे कतज्ञता प्रकट करने सैकड़ों-हजारों मील दूर से सफर तय करने पहुंचते हैं। मन्नतें पूरी होने के कारण श्रद्धालुओं की चारभुजा के नाथ में अगाध श्रद्धा है।

सबकी मनोकामना होती है पूरी
पुजारी व पूर्व सरपंच हीरालाल गुर्जर बताते हैं कि इस दरबार में जो भी भक्त अपनी मन्नत लेकर उपस्थित होता, उनकी मनोकामना पूरी होती है। उनकी कृपा राजे खुद वर्ष 2003 व 2013 की यात्रा में देख चुकी हैं। 2003 में पहली बार वसुन्धरा राजे चारभुजा के दरबार आईं तथा सरकार की सफलता के लिए मन्नत मांगी। वह पूरी भी हुई। उनका मानना है कि राजे की चारभुजा के प्रति आस्था और प्रगाढ़ होती चली गई, जब 2013 के चुनावी समर में चारभुजानाथ ने उनके 'रथ' को आगे बढ़ाया। सनातन वैद्धिक शिक्षण संस्थान, कसार के पं. उमेश द्विवेदी ने बताया कि राजे का वैदिक परम्परा में भरोसा है और साक्षात् नारायण श्री चारभुजाजी के प्रति अटूट निष्ठा है। यही उत्तम फल प्राप्ति का कारण है। चारभुजा से यात्रा शुरू होना, पूरे मेवाड़ के लिए गौरवशाली क्षण है।