
Rajasthan fake degree case : जयपुर। राजस्थान के कुछ निजी यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़े की डिग्री रेवड़ियों की तरह बांटी जा रही हैं। एसओजी के एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े की जांच कर रही टीम के सामने आया कि PTI प्रतियोगी परीक्षा 2022 में आवेदनकर्ताओं में से 1336 ने ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से डिग्री लेना बताया है।
जबकि ओपीजेएस यूनिवर्सिटी में पांच वर्षों से बीपीएड का कोर्स करवा रही थी और प्रति वर्ष 100 छात्र ही यहां से डिग्री ले सकते थे। यानी पांच वर्ष में 500 छात्रों को ही डिग्री मिली। जबकि आवेदन 1336 ने कर रखा था। ओपीजेएस से डिग्री लेने वाले 81 अभ्यर्थियों का तो सरकारी नौकरी में भी चयन हो गया था। उन्होंने कहा कि एसओजी की रिपोर्ट पर सरकार ने ओपीजेएस यूनवर्सिटी में प्रवेश पर रोक लगा दी है।
एडीजी सिंह ने बताया कि एसओजी में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी 2500 शिकायतें आ चुकी हैं और इनमें 900 की जांच चल रही है। इसके कारण अभी अन्य संगठित गिरोह की बजाय पेपर लीक, डमी अभ्यर्थी व फर्जी डिग्री से नौकरी प्राप्त करने वालों नजर है। सरकार ने गत पांच वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से सरकारी नौकरी प्राप्त करने वालों का फिर से सत्यापन करवाने के आदेश दिए हैं। परीक्षा में कौन बैठा है, डिग्री कहां से प्राप्त की और उस कॉलेज व यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड की जांच की जाए। कुछ लोगों ने विभागीय जांच पर कोर्ट स्टे ले लिया है। आगामी पांच माह में ऐसे लोगों की तस्दीक कर कार्रवाई की जाना लक्ष्य है।
एसओजी में परीक्षाओं से जुड़े इस वर्ष 38 प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनमें 28 प्रकरण डमी अभ्यर्थी और अन्य पेपर लीक मामले के हैं। उप निरीक्षक भर्ती पेपर लीक मामले में 32 थानेदार गिरफ्तार किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में तीन ऐसे हैं, जिनका परीक्षा में चयन हो गया था, लेकिन प्रशिक्षण लेने नहीं आए। वहीं 19 आरोपी गैंग से जुड़े हुए हैं। इनमें चार आरोपियों को जोधपुर रेंज पुलिस ने पकड़ा है। गिरफ्तार छम्मी सरकारी शिक्षिका होते हुए डमी अभ्यर्थी बनकर दूसरों की जगह परीक्षा देती थी। सूत्रों के मुताबिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। छम्मी बालोतरा में वर्ष 2021 से वांटेड थी और विभाग में उसकी हाजिरी हो रही थी।
Published on:
04 Jul 2024 09:32 am
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