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राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का आधिकारिक ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की जयपुर में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी।
इस दौरान आयोग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। चुनाव कार्यक्रमों की इस औपचारिक घोषणा के साथ ही पूरे ग्रामीण राजस्थान में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिसके चलते सरकारी तबादलों और नई नीतिगत घोषणाओं पर रोक लग गई। बता दें कि अदालती आदेशों को ध्यान में रखते हुए आयोग को अपनी पूरी चुनावी प्रक्रिया को 15 नवंबर से पहले हर हाल में पूरी करनी है।
'पंचायत समितियों और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव
| चरण | नामांकन की अंतिम तिथि | नाम वापसी की अंतिम तिथि | मतदान |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | 8 अक्टूबर | 15 अक्टूबर | 23 अक्टूबर |
| दूसरा चरण | 13 अक्टूबर | 19 अक्टूबर | 29 अक्टूबर |
| तीसरा चरण | 19 अक्टूबर | 26 अक्टूबर | 4 नवंबर |
| चौथा चरण | 21 अक्टूबर | 6 नवंबर | 11 नवंबर |
लोकसूचना (Notification) जारी होने की तिथियाँ
| चुनाव का स्तर / प्रकार | लोकसूचना जारी होने की तारीख |
|---|---|
| जिला परिषद सदस्य चुनाव | 8 अक्टूबर |
| पंचायत समिति चुनाव | 8, 13, 19, और 21 अक्टूबर |
| पंच-सरपंच चुनाव | 8, 13, 19, और 21 अक्टूबर |
राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायती राज चुनाव
पहले चरण की वोटिंग 13 अक्टूबर को
दूसरे चरण की वोटिंग 16 अक्टूबर को
तीसरे चरण की वोटिंग 23 अक्टूबर को
41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों के चुनाव होंगे
14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव होंगे
1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाएंगे
41 जिला प्रमुख और 457 प्रधान चुने जाएंगे
सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव बैलेट पेपर से होगा, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से होंगे
पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण
कुल वोटरों में 51.82% पुरुष और 48.18% महिला मतदाता
जयपुर में सबसे ज्यादा 18.99 लाख वोटर, जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख
कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में जिला प्रमुख और प्रधानों के चुनाव 22 दिसंबर को होंगे
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू तबादलों पर रोक, मंत्रियों के सरकारी वाहनों और सरकारी गेस्ट हाउस/डाक बंगलों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी
गौरतलब है कि इस बार के पंचायती राज चुनावों का पैमाना बेहद व्यापक है, जिसमें राज्य के करीब 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और ग्रामीण सरकार की नुमाइंदगी तय करेंगे। इन चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कुल 1.69 लाख से अधिक प्रतिनिधियों का चयन करेंगे।
प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है और सुरक्षा व व्यवस्था के मद्देनजर मतदान 4 चरणों में संपन्न कराए जाने है। सबसे खास बात यह है कि इस बार भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सख्ती से लागू रहेगा, जो ग्रामीण नेतृत्व की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी होने वाले विस्तृत कार्यक्रम के अनुसार इस बार पंचायती राज के विभिन्न स्तरों पर होने वाले चुनावों में पदों की स्थिति और मतदान की पद्धति बेहद स्पष्ट है। त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत होने वाले इन चुनावों में मतदान के तरीकों को लेकर भी नियम तय किए गए हैं:
सरपंच और वार्ड पंच चुनाव: ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बिना किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक सिंबल (पार्टी सिंबल) के लड़े जाएंगे और इनमें पारंपरिक मतपत्र (Ballot Paper) का इस्तेमाल किया जाएगा।
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव: जिला स्तर और पंचायत समिति स्तर पर होने वाले मुकाबले दलीय आधार पर यानी पार्टी सिंबल पर लड़े जाएंगे, और इनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रयोग किया जाएगा।
ग्रामीण राजनीति में सामाजिक न्याय और सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए सीटों के आरक्षण का खाका पहले ही तैयार किया जा चुका है।
सरपंच पद आरक्षण: सरपंच पदों के लिए एसटी (अनुसूचित जनजाति) के लिए 3,058, एससी (अनुसूचित जाति) के लिए 2,493 और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए 1,961 पद आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में एसटी के सभी 1,253 सरपंच पद पूरी तरह आरक्षित रहेंगे।
वार्ड पंच आरक्षण: वार्ड पंचों के स्तर पर एससी के लिए 21,962, एसटी के लिए 19,117 और ओबीसी के लिए करीब 15,000 वार्ड आरक्षित किए गए हैं।
हाल ही में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनावों के तुरंत बाद आ रहे ये पंचायती राज चुनाव सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक ताकत मापने का एक और बहुत बड़ा मंच बन गए हैं। गांवों की सरकार पर कब्जा जमाने के लिए इस बार मुख्य मुकाबलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के अलावा सीपीआईएम (CPI-M), राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और आम आदमी पार्टी (AAP) जैसे तमाम क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल भी अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
जिला प्रमुख और प्रधान के पदों पर अधिकतम जीत हासिल करना सभी दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। आचार संहिता लागू होने के साथ ही गांवों में राजनीतिक बैठकों और चुनावी सरगर्मी का दौर तेजी से शुरू हो गया है।
Updated on:
03 Oct 2026 03:53 pm
Published on:
03 Oct 2026 03:08 pm
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