
AI generated image of Child Sexual Exploitation and Abuse Material.
पुलिस ने बाल यौन शोषण सामग्री Child Sexual Exploitationand Abuse Material (CSEAM) के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने बताया कि टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री शेयर करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।
राजस्थान पुलिस ने 25,000 से अधिक महत्वपूर्ण सूचनाओं और National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) की टिपलाइनरिपोर्ट्स के आधार पर गहन तकनीकी विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, व्हाट्सऐप जैसी मैसेजिंग ऐप्स और इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय नेटवर्क की पहचान की गई।
पुलिस का फोकस उन लोगों पर है जो गुप्त और पेड ग्रुप्स के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री का आदान-प्रदान कर रहे हैं। कोडेड हैशटैग नेटवर्क पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी सामग्री को देखना, डाउनलोड करना, रखना या शेयर करना POCSO अधिनियम, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।
अभियान के तहत बाल यौन शोषण सामग्री के ऑनलाइन प्रसार में शामिल 7,800 से अधिक यूआरएल और प्रोफाइल्स को ब्लॉक करवाया गया है। साथ ही 15,000 से अधिक मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस भी ब्लॉक किए गए हैं। Telegram, Discord, WhatsApp, Instagram, Facebook, Snapchat और Cloud Storage पर चल रहे गुप्त व Paid Groups तथा Coded Hashtag Network पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस इन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहकर सामग्री फैलाने वाले नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हुई है। बार-बार अपराध करने वाले (RepeatedOffenders) को चिन्हित कर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ के विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।
यदि किसी नागरिक का मोबाइल नंबर इस सूची में आने के कारण ब्लॉक हो गया है, तो वे अनब्लॉक करवाने के लिए ईमेल के जरिए sp.cybercrime@rajpolice.gov.in पर अनुरोध भेज सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि निर्दोष लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जा रही है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध सामग्री की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल पर दें।
राजस्थान पुलिस ने दोहराया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री का कोई भी रूप में उपयोग या प्रसार पूरी तरह अवैध है। टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर सक्रिय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। पुलिस का संदेश साफ है-आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर। बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण कदम है। नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है। राजस्थान पुलिस का यह बड़ा एक्शन बाल यौन शोषण सामग्री के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का उदाहरण है। टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, व्हाट्सऐप और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय नेटवर्क को निशाना बनाकर पुलिस ने साबित किया है कि साइबर क्राइम के क्षेत्र में कोई भी अपराधी बच नहीं सकता।
Updated on:
29 Sept 2026 11:34 am
Published on:
29 Sept 2026 11:05 am
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