
शहरी सेवा शिविर। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। लोगों को राहत देने के लिए लगे शहरी सेवा शिविरों में आए आवेदनों में कई तरह के शुल्क व पेनल्टी में छूट का प्रावधान होने के बावजूद निर्धारित अवधि में आवेदन करने के बाद भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। शिविर की अवधि खत्म होने के बाद भी जिन मामलों का निस्तारण नहीं हो पाया, उनमें कई निकायों की ओर से छूट के बजाय पुरानी दरों और पेनल्टी के साथ डिमांड नोट जारी किए जा रहे है।
जबकि, सरकार ने स्पष्ट किया था कि शिविर की अवधि में जिन लोगों ने आवेदन कर दिया है, लेकिन उनका काम शिविर अवधि में पूरा नहीं हो पाया, उन्हें शिविर में घोषित छूट का लाभ दिया जाएगा। कई निकायों में आवेदकों को जारी डिमांड नोट में लाखों रुपए की पेनल्टी और अन्य राशि जोड़ दी गई है। भू-खंडधारियों ने आपत्ति की तो अफसरों ने 7 अक्टूबर से शुरू हो रहे सेवा सेतु अभियान में दोबारा आवेदन करने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली।
30 हजार मूल राशि, ब्याज जुड़ा तो डिमांड 1.09 लाखःजयपुर के गोपालपुरा बाईपास निवासी राजेन्द्र गुप्ता ने पट्टे के लिए निर्धारित अवधि में आवेदन किया। निकाय चुनाव की आचार संहिता के बीच डिमांड नोट जारी किया। इसमें मूल राशि तो 30 हजार रुपए थी और ब्याज के करीब 79 हजार रुपए जोड़ दिए गए। आवेदक ने आपत्ति करते हुए संशोधित डिमांड नोट की मांग की है।
1.14 लाख का डिमांड जारी कर अफसर बोले- अब कुछ नहीं कर सकते: सवाईमाधोपुर में सूर्यनगर कॉलोनी के सुमित श्रीमाली ने भी पट्टे के लिए आवेदन किया। उन्हें शिविर के तहत मिलने की वाली राहत की बजाय ज्यादा राशि का डिमांड नोट जारी कर दिया गया। जब आवेदक ने आपत्ति जताई तो अफसरों को गलती का अहसास तो हुआ, लेकिन कुछ नहीं कर पाने की स्थिति बता दी। पट्टे के लिए 1.14 लाख रुपए का डिमांड नोट जारी कर दिया। इसमें पेनल्टी, ब्याज व अन्य राशि जोड़ दी गई।
90ए आवेदन लंबित, छूट के बजाय 1.19 लाख की मांग: सीकर नगर परिषद में एक मामला कृषि से गैर कृषि उपयोग (90ए) का सामने आया। आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रकरण लंबित रहा। बाद में जारी डिमांड में 1 लाख 19 हजार रुपए जमा कराने के लिए कहा गया, जिसमें पेनल्टी भी शामिल है। आवेदक के अनुसार शिविर में आवेदन करते समय उसे बताया गया था कि समय पर आवेदन करने पर संबंधित छूट का लाभमिलेगा। अब अतिरिक्त राशि जमा कराने को कहा जा रहा है।
शिविर जनहित को ध्यान में रखकर ही शुरू किए गए थे। यदि कहीं नियमों के अनुरूप काम नहीं हो रहा है या किसी तरह की दिक्कत सामने आ रही है तो इसकी समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ी तो दोबारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
-झाबर सिंह खर्रा, नगरीय विकास मंत्री
Updated on:
30 Sept 2026 12:17 pm
Published on:
30 Sept 2026 12:17 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
