
Rajasthan RERA Defaulter Builders List - Related AI PIC
राजस्थान में अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई से सपनों का आशियाना या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे आम खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने धोखाधड़ी करने वाले, प्रोजेक्ट अटकाने वाले और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने वाले बिल्डरों और प्रमोटरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी पूरी 'कुंडली' सार्वजनिक कर दी है। रेरा ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदेश के 37 प्रमुख बिल्डर-डेवलपर्स के 42 प्रोजेक्ट्स से जुड़े डिफॉल्टरों का पूरा ब्योरा अपलोड कर दिया है। खास बात यह है कि इस सूची में सिर्फ प्रमोटरों के नाम ही नहीं, बल्कि उनकी फोटो, डिफॉल्टर होने का कारण और उनके खिलाफ रेरा कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसलों की कॉपी भी सीधी उपलब्ध कराई गई है।
इस बड़े फैसले के बाद अब राजस्थान में कोई भी प्रॉपर्टी खरीदार केवल बिल्डरों के लुभावने विज्ञापनों और बड़े-बड़े दावों के भरोसे नहीं रहेगा। फ्लैट या प्लॉट की बुकिंग करने से पहले ग्राहक घर बैठे ही रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित बिल्डर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड, उस पर पेंडिंग चल रहे कानूनी मामले और जुर्माने की स्थिति आसानी से जांच सकेगा। रेरा की इस पारदर्शी पहल से जयपुर, जोधुपर, कोटा, उदयपुर और भिवाड़ी सहित पूरे प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी।
रेरा राजस्थान की वेबसाइट पर जारी की गई इस डिफॉल्टर सूची में प्रदेश के कई जाने-माने और बड़े रियल एस्टेट ग्रुप्स के नाम शामिल हैं। जिन प्रमुख प्रमोटरों और कंपनियों के नाम तथा फोटो पोर्टल पर सार्वजनिक किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
एफएस हाउसिंग (FS Housing)
मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स (Mojika Real Estate & Developers)
विनायक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स (Vinayak Builders & Developers)
आस्था बिल्डहोम डेवलपर्स (Aastha Buildhome Developers)
रिको डेवलपर्स (RIICO Developers)
इन सभी बिल्डरों के खिलाफ रेरा कोर्ट में खरीदारों की शिकायतों के आधार पर सुनवाई हुई थी। आदेशों की पालना न करने और ग्राहकों के पैसे न लौटाने के कारण प्राधिकरण ने इन कंपनियों और इनके प्रमोटरों को औपचारिक रूप से 'डिफॉल्टर' घोषित करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
रेरा प्राधिकरण द्वारा सार्वजनिक किए गए 42 प्रोजेक्ट्स के ब्योरे से यह स्पष्ट होता है कि बिल्डरों ने खरीदारों के हितों के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया है। पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दर्ज मामलों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
32 मामले: बुकिंगकर्ताओं और ग्राहकों को रेरा द्वारा तय की गई जुर्माने या रिफंड की राशि जमा न कराने के हैं।
4 मामले: रेरा अधिनियम की धारा 34(सी) के प्रावधानों के तहत बिल्डर को डिफॉल्टर घोषित किया गया है।
3 मामले: रेरा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अंतिम आदेशों और निर्देशों की सरेआम अवहेलना करने से जुड़े हैं।
1 मामला: तय समय-सीमा के भीतर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरा न करने और खरीदारों को पजेशन न देने का है।
1 मामला: बिल्डर के बैंक खातों को फ्रीज करने के साथ-साथ उसकी संपत्तियों की कुर्की की कानूनी कार्रवाई का है।
1 मामला: वित्तीय गड़बड़ियों के चलते बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने से संबंधित है।
आमतौर पर जब कोई आम नागरिक या मध्यमवर्गीय परिवार अपना पहला फ्लैट या मकान खरीदता है, तो उसका पूरा ध्यान केवल प्रोजेक्ट की लोकेशन, आसपास के रोड नेटवर्क, फ्लैट की कीमत, स्विमिंग पूल या क्लब हाउस जैसी सुविधाओं और कंस्ट्रक्शन की बाहरी स्पीड पर ही रहता है। ज्यादातर खरीदार बिल्डर के पिछले इतिहास, उसके पुराने प्रोजेक्ट्स की स्थिति या उसके खिलाफ चल रहे अदालती मामलों की पड़ताल नहीं कर पाते थे।
बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड जांचने की कोई सीधी और पारदर्शी व्यवस्था न होने के कारण बाद में पजेशन में देरी, वादे के मुताबिक सुविधाएं न मिलना, हिडन चार्जेस और कानूनी विवादों के कारण खरीदारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब रेरा की वेबसाइट पर डिफॉल्टरों की फोटो, नाम और अदालती आदेश एक क्लिक पर मिलने से आम जन को ठगी से बचाना बेहद आसान हो जाएगा।
अगर आप भी राजस्थान में कहीं नया फ्लैट, विला या कमर्शियल स्पेस बुक करने जा रहे हैं, तो रेरा की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत इन 3 आसान स्टेप्स में बिल्डर की पड़ताल कर सकते हैं:
वेबसाइट विजिट करें: सबसे पहले रेरा राजस्थान के आधिकारिक पोर्टल (rera.rajasthan.gov.in) पर जाएं।
डिफॉल्टर लिस्ट सेक्शन खोजें: होमपेज पर 'Promoters/Projects' टैब के अंतर्गत दिए गए 'Defaulter List' या 'Orders & Judgments' सेक्शन पर क्लिक करें।
प्रोजेक्ट का नाम या बिल्डर खोजें: सूची में अपने संबंधित बिल्डर या कंपनी का नाम सर्च करें। यदि बिल्डर का नाम सूची में है, तो उसके सामने दिए गए कोर्ट ऑर्डर (PDF) को डाउनलोड करके पूरी जानकारी पढ़ें।
रेरा अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि बाजार में ईमानदारी से काम कर रहे प्रमोटरों को भी बढ़त दिलाएगा और प्रदेश के रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता का एक नया दौर शुरू होगा।
Updated on:
28 Oct 2026, 10:27 AM IST
Published on:
28 Oct 2026, 10:20 AM IST
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