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मोदी का चिन्तन नहीं पढ़ेंगे राजस्थान के अफसर, सरकार ने लगाई किताबों पर रोक

राजस्थान के मुख्य सचिव के नाम गुजरात के मुख्य सचिव ने भेजी थीं 210 किताबें। भारतीय सेवा के अफसरों में बंटनी थीं
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जयपुर

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Pushpendra Singh Shekhawat

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Updated: 22 May 2018, 9:40 PM IST

jaipur

मोदी का चिन्तन नहीं पढ़ेंगे राजस्थान के अफसर, सरकार ने लगाई किताबों पर रोक

शादाब अहमद / जयपुर . राजस्थान में सेवारत भारतीय सेवा के अफसर अब प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का चिन्तन नहीं पढ़ेंगे। मुख्यमन्त्री कार्यालय ने 'चिंतन शिविर' नाम की उन पुस्तकों को अफसरों में बांटने पर रोक लगा दी है, जो गुजरात से आई थीं। इनमें गुजरात में 2003 से 2011 के बीच चिन्तन शिविरों में मोदी की ओर से दिए गए भाषणों का संकलन है।

राजस्थान के मुख्य सचिव के नाम 7 मई को ये 210 पुस्तकें गुजरात के मुख्य सचिव जेएन सिंह ने भेजी थीं। इन्हें भारतीय सेवा के अफसरों को बांटने के लिए कहा था। मुख्य सचिव कार्यालय से 16 मई को ये पुस्तकें कार्मिक विभाग को मिलीं। विभाग ये पुस्तकें अफसरों को बांटने ही वाला था लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय को पता लगा तो पूछताछ शुरू हो गई।

सीधे मुख्य सचिव को क्यों भेजी?
सूत्रों की मानें तो गुजरात के मुख्य सचिव ने सीधे राजस्थान के मुख्य सचिव को पुस्तकें भेजी और अफसरों को बांटने के लिए लिखा, इसे मुख्यमन्त्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने पुस्तकें बांटने पर फिलहाल रोक लगा दी है।


पत्र में गुजरात के मुख्य सचिव ने यह लिखा

गुजरात के मुख्य सचिव ने पत्र में लिखा, मुख्यमंत्री रहते नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में चिन्तन शिविरों का आयोजन किया था। वर्ष 2003 से 2011 के बीच ऐसे 7 शिविरों में मोदी के चुनिंदा भाषणों का संकलन कर सरकार ने 'चिन्तन शिबिर' पुस्तक प्रकाशित कराई है। मोदी के भाषणों से गुजरात में कई मुद्दों पर निर्णय करने में मदद मिली है, इसलिए यह पुस्तक भारतीय सेवा के अफसरों को भी दी जाए। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केन्द्र के डायरेक्टर जनरल को भी यह पुस्तक भेजी जाए, जहां इसे पुस्तकालय में रखा जाए।


सीएम, कैबिनेट की सलाह जरूरी नहीं
पुस्तक में एक जगह मोदी के भाषण का हवाला देकर कहा गया है कि दुनियाभर में राजनीतिक दल वोट लेने के लिए घोषणा पत्र जारी करते हैं। जबकि हमारे पूर्वजों, ऋषि-मुनियों ने आने वाली पीढिय़ों की जरूरत पूरी करने का घोषणा पत्र बना रखा था। यदि हम इसे अमल में लाएं तो मुख्यमंत्री या कैबिनेट की सलाह भी जरूरी नहीं है।


गुजरात सरकार के लिए गोयल ही मुख्य सचिव

गुजरात के मुख्य सचिव ने 7 मई को भेजे पत्र में राजस्थान का मुख्य सचिव एनसी गोयल को बताया है। गोयल 30 अप्रेल को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।