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राजस्थान में स्वरोजगार योजना के आंकड़े चौंकाने वाले: लक्ष्य लाखों का, लेकिन लोन मिला सिर्फ 2 हजार को

राजस्थान में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 1.26 लाख से अधिक युवाओं ने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक करीब 2 हजार युवाओं को ही ऋण मिला है। हजारों आवेदन बैंकों और वित्तीय संस्थानों में अटके हुए हैं।
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Rajasthan Yuva Swarojgar Yojana

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जयपुर. युवाओं का मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के जरिए कारोबार खड़ा करने का सपना या तो बैंकों-वित्तीय संस्थानों की फाइलों में कैद है या फिर सरकारी फाइलों में ही उलझकर दम तोड़ गया। युवाओं ने आवेदन में तो सरकार के लक्ष्यों को पार कर लिया, लेकिन प्रक्रिया में सरकारी या बैंकों की खानापूर्ति में हार गए। इसके चलते करीब सवा लाख आवेदनों में से 50 हजार से भी कम आवेदन बैंकों तक पहुंचे। बैंकों ने तो दो हजार युवाओं को ही ऋण उपलब्ध कराया है। इस योजना में प्रदेशभर में सवा लाख से अधिक आवेदन आए, जिनमें कुल 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऋण चाहा गया। इनमें से जांच में 46 हजार से अधिक युवाओं के आवेदन खरे पाए गए, इन आवेदनों को उद्योग विभाग ने मंजूर कर बैंकों या वित्तीय संस्थानों को भेज दिया। इनमें से बैंकों-वित्तीय संस्थानों ने ढाई हजार से अधिक आवेदनों को मंजूर भी कर लिया, लेकिन ऋण अब तक करीब दो हजार को ही मिल पाया है।

32 जिलों में 10% भी लक्ष्य पूरा नहीं

शुरुआत में 31 हजार युवाओं को स्वरोजगार देने का लक्ष्य रखा गया, जिसे दो गुना तक कर दिया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट भाषण में इस योजना के जरिए एक लाख युवाओं का साथ देने का भरोसा दिलाया गया। उधर, हकीकत यह है कि लक्ष्य की करीब 6.5 फीसदी ही प्राप्ति हो सकी है। प्रदेश के 32 जिलों में तो स्थिति यह है कि लक्ष्य के 10 फीसदी से भी कम युवाओं को ही इस योजना का साथ मिला है।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजनाः आंकड़ों में यह स्थिति

  • ऋण चाहने वाले युवा- 1.26 लाख से अधिक
  • आवेदनों में ऋण मांगा- 6117 करोड़ से अधिक
  • उद्योग विभाग की कमेटियों से मंजूर आवेदन-46 हजार से अधिक
  • बैंकों-वित्तीय संस्थाना में अटके आवेदन- 43 हजार से अधिक
  • बैंकों से मंजूर आवेदन- 2600 से अधिक
  • आवेदन, जिनमें बैंकों से ऋण जारी 2 हजार से अधिक

युवा बोले… सपना मंजूरी के बाद भी अधर में

  1. श्रीगंगानगर के गांव 82 रब निवासी ओमप्रकाश ने फर्नीचर व्यवसाय के लिए ऋण चाहा, जिसके लिए जिला उद्योग केंद्र में आवेदन किया और सात लाख रुपए ऋण स्वीकृत कर आवेदन मरुधरा ग्रामीण बैंक चला गया। इसके बावजूद बैंक ने ऋण देने से इनकार कर दिया।
  2. सीकर निवासी आर्यन सिंह ने बताया कि ई-मित्र व फोटोग्राफी के लिए आवेदन किया था। इसके लिए लगभग छह लाख रुपए चाहे गए, लेकिन पैसा नहीं आया है। विभाग की ओर से यह भी नहीं बताया कि उनका लोन आवेदन स्वीकृत हो गया या नहीं।

अधिकारी बोले… आवेदक नकद पैसा मांग रहे

उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कमियों की पूर्ति नहीं होने से बड़ी संख्या में आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे हैं। और जो स्वीकार हो रहे हैं, उनमें भी अधिकांश में युवा मशीनरी या कार्य के लिए बैंकों से सीधे भुगतान के बजाय हाथ में नकद राशि चाह रहे हैं।

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