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Rajasthan Election 2018: ‘हनुमान’ बेनिवाल का साथ चाहते हैं आप के ‘राम’..!!!

राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प के लिए ताल ठोक रहे खींवसर के विधायक हनुमान का चुनावी साथ देने के लिए आप के 'राम' आ रहे हैं!!!

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Rampal Jat

विशाल 'सूर्यकांत'/ जयपुर। राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प के लिए ताल ठोक रहे खींवसर के विधायक हनुमान का चुनावी साथ देने के लिए आप के 'राम' आ रहे हैं!!!

राजस्थान ये पहला मौक़ा है जब 'चुनावों से पहले' कांग्रेस और बीजेपी के खिलाफ एक साथ कई मोर्चे खुलने जा रहे हैं। इससे पहले हमेशा से राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी की अलग-अलग धूरी पर घुमते हुए कुछ बागी निर्दलीय धूमकेतू बनकर राजस्थान की राजनीति के क्षितिज पर नजर आ जाया करते थे।

टिकट कटने के अलावा इन बागियों का ओर कोई बड़ा मुद्दा नहीं होता था। इसीलिए जिस पार्टी की सरकार बनती वो उसी में फिर समाहित हो जाया करते थे। इस बार तस्वीर का रूख़ कुछ अलग है। हनुमान बेनिवाल पूरे पांच साल अपनी ही पार्टी के लिए विपक्ष बने रहे। यही हाल भारत वाहिनी पार्टी बनाकर अपनी अलग सियासत कर रहे घनश्याम तिवाड़ी की है। पार्टी ने अभी भी उन्हें निकाला नहीं है लेकिन वो नई पार्टी बना कर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं और बीजेपी नेताओं को जमकर कोस रहे हैं।

इन सब के बीच बीजेपी से छिटक कर किसानों की राजनीति करने वाला राजनीति धूमकेतू सक्रिय है। बीजेपी की सरकार में ही किसान आंदोलन करते हुए वो जेल में भी गए हैं। अब चुनाव का वक्त आया है तो आम आदमी पार्टी के साथ बीजेपी और कांग्रेस दोनों को मात देने के लिए तीसरा मोर्चा बनाने की वकालत कर रहे हैं।

इसी कवायद में वो हनुमान का साथ देने को भी तैयार है। यानि हनुमान बेनिवाल को राम नाम के एक शख्स का साथ मिलने जा रहा है। इन शख्स का पूरा नाम है रामपाल जाट। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे रामपाल, पूरी शिद्दत से राजस्थान की राजनीति में तीसरा मोर्चा बनाने की बात कह रहे हैं। कभी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के करीबी रहे रामपाल जाट, बीजेपी के प्रदेश महामंत्री रहे हैं।

चुनावी मौसम में रामपाल जाट ने आम आदमी पार्टी से नाता जोड़ लिया है। खुद रामपाल कहते हैं कि वो टोंक से इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी में है। राजस्थान की राजनीति में तीसरा विकल्प देने के लिए आम आदमी पार्टी उन सभी लोगों के संपर्क में है जो राजस्थान में मजबूत तीसरा मोर्चा की बात करते हैं।

रामपाल जाट ने पत्रिका से खास मुलाकात में कहा कि वो हनुमान बेनिवाल,घनश्याम तिवाड़ी, बहुजन समाजवादी पार्टी समेत उन सभी लोगों से गंभीरता से बात चल रही है कि सभी अपनी रीति-नीति पर चलते हुए चुनाव में उतरें लेकिन गठबंधन कर चलें। रामपाल जाट की बात से लग रहा है कि आम आदमी पार्टी का टिकट चयन का अपना फॉर्मूला है

इसीलिए अभी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति थी। लेकिन अगर बेनिवाल,तिवाड़ी और बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ कुछ समझौता होगा तो कई सीटों पर समझौते करने में आम आदमी पार्टी को गुरेज नहीं है। लेकिन दिक्कत ये है कि हनुमान बेनिवाल, घनश्याम तिवाड़ी और रामपाल जाट, तीनों एक ही पार्टी के रहे हैं। पार्टी के नेतृत्व से अनबन के बाद तीनों से अलग रास्ते बना लिए हैं।

चुनाव तक तो ठीक है लेकिन आम आदमी पार्टी का संकोच है कि चुनाव के बाद अगर मूल पार्टी बीजेपी को इनकी जरूरत पड़ी तो कहीं वापस पार्टी में न लौट जाएं। जैसा कि राजस्थान में बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ हुआ था।

कहने को तो पार्टी ने राजस्थान में पहली बार छह विधानसभा सीटें जीती थी। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अल्पमत सरकार को बचाने के लिए पूरा बहुजन समाजवादी पार्टी का विधायक दल कांग्रेस में शामिल हो गया था।

उस वक्त राजस्थान की राजनीति में अच्छी शुरुआत करने के बावजूद बहुजन समाजवादी पार्टी आज तक नेपथ्य से निकल नहीं पाई है। राजस्थान की राजनीति में गठबंधन की संभावनाएं और अन्य मुद्दों पर रामपाल जाट से कुछ तीखे सवाल। आप भी पढ़िए, क्या कहा रामपाल जाट ने

सवाल- आप बीजेपी के संस्कारों में पले-बढ़े हैं। आम आदमी पार्टी के साथ चले तो गए मगर खुद को कैसे बदलेंगे ?

रामपाल जाट - जहां किसान की भलाई हो, वहीं मेरा मन लगता है। किसानों के नाम पर छलावा करने वालों के साथ मैं नहीं रहता। पिछली सरकार में वसुन्धरा राजे की सरकार के जरिए किसानों के लिए काम करवाए। विद्युत कनेक्शन नीति से तब अच्छे बदलाव आए थे। मगर इस बार किसानों के साथ किए वादे पूरे नहीं किए। इसीलिए पांच साल से अपनी ही पार्टी से अलग खड़ा था।


आप बीजेपी,खासकर वसुन्धरा राजे के विश्वस्त थे, ऐसा क्या हुआ कि पांच साल न आप बीजेपी के गलियारों में दिखे और न ही बीजेपी ने आपको जोड़ने में दिलचस्पी दिखाई ?

रामपाल जाट - हमारी लड़ाई सत्ता में आने के बाद शुरू हुई। सरकार में आने के बाद किसानों से किए वादे पूरे नहीं हुए जबकि मैं नेताओं से पूछ कर ही लोगों को आश्वासन देता था। 2013 के घोषणा पत्र में लिखा है कि किसान की आय ही नहीं,बल्कि किसान का सम्मान भी बढ़ाएंगे। लेकिन सरकार आने के बाद सिर्फ 9 फीसदी मूंगफली की खरीद हुई। धीरे-धीरे खरीद बंद करने की नौबत आ गई।

मैंने वादा याद दिलाया मगर मेरी बात नहीं मानी। फिर धरना,आंदोलन,जेल जो कुछ हुआ वो सबके सामने है। किसानों के मुद्दे पर केन्द्र भी राज्य के मुताबिक चलने लगा। मुझे लगा कि अब संघर्ष का ही रास्ता है। जब फिर अपनी ही पार्टी की सरकार में जेल चले गए,जहां आमने-सामने हो गए,वहां पार्टी से क्या रिश्ता रखता।


सवाल- आपको बीजेपी ने टिकट नहीं दी और सरकार आने के बाद कोई ओहदा भी नहीं दिया। कहीं अपनी खीज और महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए तो किसानों को जरिया नहीं बना रहे थे ?

रामपाल जाट- ऐसे सवाल पैदा होना स्वाभाविक है,मुझे तो ऑफर भी था। मुझे पद का लालच दिया। पांच साल तक किसान आयोग का पद मेरे लिए खाली रखा था। मगर मुझे किसान आयोग का हश्र मुझे पता है।

जब तक किसान आयोग को वैधानिक मान्यता न दी जाए,कोई अर्थ नही था। कर्नाटक ने मंत्रीमंडल के जरिए किसान आयोग बनाया। महाराष्ट्र और पंजाब में किसान आयोग की मजबूती पर काम हुआ। मैंने ड्राफ्ट दिया लेकिन किसान आयोग पर काम नहीं हुआ।


सवाल- आम आदमी पार्टी की रीति-नीति में नहीं ढ़ल पाए तो क्या करेंगे ?
रामपाल जाट- हम किसान राज की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमनें 'किसान राज का यह पैगाम,खुशहाल ग्राम,युवाओं को काम,फसल के मिलेंगे उचित दाम' का नारा दिया है। आम आदमी पार्टी ने प्रस्तावित घोषणा पत्र में किसान राज को प्रमुखता दी है। किसान विधेयक के प्रारूप पर कानून बनाने का वादा किया है।

2010 में चार मुख्यमंत्रियों की हुड्डा कमेटी की सिफारिशों पर दिल्ली के अलावा किसी राज्य ने अमल नहीं किया है। फसल खराबे पर एक हैक्टेयर के लिए 25 हजार की सिफारिश को दिल्ली सरकार ने दोगुना कर 50 हजार रूपए देने का कानून बनाया है। आम आदमी पार्टी की सरकार के इस काम से मैं प्रभावित हुआ हूं।


सवाल- राजस्थान में आम आदमी की जमीन नहीं है। क्या आप कांग्रेस,बीजेपी के और नाराज लोगों को भी आप पार्टी में लाएंगे ?

रामपाल जाट - आम आदमी पार्टी की सरकार अनटेस्टेड है। किसानों के मुद्दे पर इस लडाई में साथ रहने का वादा किया है। ये बात सही है कि दो दलीय राजनीति में समर्थन जुटाना बड़ी चुनौती है। मगर मैं राजस्थान के गांवों में घुमा हूं। जनता विकल्प चाहती है। अच्छी छवि का जो साथ आना चाहेगा उसे जोडेंगे।

सवाल- बीजेपी से अलग हुए नेता अपना कोई बड़ा वजूद नहीं बना पाए हैं। कुछ कोशिश में है तो कुछ वापस पार्टी में लौट आए है। रामपाल जाट बीजेपी पार्टी से नाराज है या बीजेपी पार्टी के नेताओं से ?

रामपाल जाट- देखिए,मैं तो सिस्टम से नाराज हूं। लगातार संघर्ष करने वाला और रातों-रात पोस्टर लगाने वाले नेता अलग होते हैं। अगर कलम हाथ में आई तो कानून बनेगा, कलम हाथ में नहीं आई तो सदन और सड़क पर संघर्ष अनवरत चलता रहेगा, पार्टी में लौटने का सवाल ही नहीं है।

सवाल- क्या भाजपा के हार्डकोर नेता ने पार्टी बदलने के साथ आपने हिन्दुत्व,कॉमन सिविल कोड, ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर अपना मन भी बदल लिया है ?

रामपाल जाट - मेरी अपनी धारणा है जो पहले भी स्पष्ट थी। हिन्दुत्व और राम मंदिर जैसे मुद्दों का राज में आने के लिए प्रयोग करना उचित नहीं। ऐसा राम-राज्य आना चाहिए जिसमें सभी खुशहाल,निरोगी हो,सही दाम मिले। मगर आज राम-राज्य के मामले में मुद्दे से भटक गए हैं। खुशहाली वाले राम-राज्य को मुख्य बहस से बाहर कर दिया है। हिन्दुत्व मेरी आस्था का विषय है राज लाने का विषय नहीं। वैसे भी देश में किसान से बड़ा हिन्दू कोई नहीं।


सवाल- आप कह रहे हैं संघर्ष करेंगे ? लेकिन आम आदमी पार्टी के भीतर रहकर लड़ना आसान है ? योगेन्द्र यादव,प्रशांत भूषण,कुमार विश्वास कई नेताओं ने अपने मुद्दों पर अलग राय रखी थी।

रामपाल जाट- देखिए, मैं मेरी शर्तों पर पार्टी में हूं, किसी की कृपा पर न था और न रहूंगा। मैं राजनीति में किसानों का राजदूत हूं। जब तक किसानों की बात चलेंगे,पार्टी में चलूंगा। टकराव होता रहता है। गलतियों से सीखना चाहिए,सुधारना चाहिए।


सवाल - गलतियों से सीखना और सुधारने का मतलब ये कि रामपाल जाट चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी से अलग हुए लोगों को फिर जोड़ा जाना चाहिए। क्या आप कोशिश करेंगे ?

रामपाल जाट- इन सब व्यक्तियों के बारे में गहराई से जानकारी नहीं है। हर व्यक्ति की स्टडी करके अगर मुझे लगा कि जरूर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।


सवाल- आप सीधे अरविन्द केजरीवाल को कह पाएंगे ?

रामपाल जाट – मैं किसी से भी कह सकता हूं। बीजेपी में लोग कहते रहते थे कि वसुन्धरा राजे जी से कोई चर्चा नहीं कर सकता था, मगर मैं करता रहता था।


सवाल- आम आदमी पार्टी वैकल्पिक राजनीति की बात करती थी, मगर व्याधियां तो उसमें भी आई हैं।

रामपाल जाट- कोई भी व्यक्ति काम शुरु करता है तो उसका अनुभव कम होता है। काम करते-करते परिपक्वता आती रहती है।


सवाल- पार्टी में आने के लिए क्या समझौता हुआ है, आपने कितनी टिकट मांगी है ?
रामपाल जाट- समझौता नहीं सहमति बनाने की बात कही है। ग्रुप डिस्कशन का कल्चर होना चाहिए। टोंक में मैंने छह महिने से रायशुमारी करवाई है। दूसरी पार्टियों में नेताओं ने पार्टी और धनतंत्र से लोकतंत्र का हनन किया है। प्रत्याशी चयन का काम फाइव स्टार होटल्स में नहीं, किसान की चौपाल पर होना चाहिए। हमनें यही काम किया है।


सवाल- किसानों का भला करने की मांग,फिर किसानों के जरिए चुनावी राजनीति में आना। सब यही तो काम करते आए हैं। आप भी यही कर रहे है..

रामपाल जाट- मैंनें 200 विधानसभा सीटों के विधायकों को देखा है। 200 में से 182 विधायकों ने अपना पेशा कृषि बताया है। आप बताओ जिस सदन में 91 फीसदी किसान हों, फिर भी उपज के दाम न मिलें। ऐसा कैसे हो सकता है। खेत का दर्द,हमारे सदनों का दर्द नहीं बन पा रहा है। पहले कानून बनाने से पहले बार काउंसिल में कॉपी भेजी जाती थी, उस पर चर्चा होती थी। यही स्थिति फिर लाना है।


सवाल- आप विकल्प के लिए जोर दे रहे हैं, क्या बेनिवाल,तिवाड़ी,बसपा के साथ समझौता करेंगे ?

रामपाल जाट – हम चाहते हैं कि राजस्थान में सशक्त विकल्प बने, समान विचारधारा के लोगों को साथ में लेकर चलेंगे। मैं गंभीरता से प्रयास शुरु कर रहा हूं। अपने-अपने मुद्दों पर रहें और तालमेल बनाकर लड़े। हमारा नारा है कि वो जाति धर्म तोड़ेंगे, हम मूंग उडद से जोडेंगे।

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