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तप आराधना से आत्मबल और मोक्ष का मार्ग होता है प्रशस्त : मुनि डॉ. आलोक कुमार

जयपुर

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Newsdesk

Aug 07, 2026

Rajasthan

गदग. तेरापंथ भवन में आयोजित भव्य तप अभिनंदन समारोह में आठ उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण करने वाली सोहनी देवी भंसाली, सोनू देवी भंसाली एवं शीतल देवी भंसाली का श्रद्धापूर्वक सम्मान किया गया। वहीं किशोर मंडल के सदस्य दिवेश जीरावाला का भी विशेष अभिनंदन किया गया। समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से ओतप्रोत रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। इस अवसर पर मुनि डॉ. आलोक कुमार ने तपस्या के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप केवल उपवास का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, कठोर परिश्रम और जीवन की कठिन परिस्थितियों को प्रसन्नतापूर्वक सहन करने की साधना है। उन्होंने कहा कि तप आधि-व्याधि का प्रभावी उपचार है तथा इसके माध्यम से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव बन जाते हैं। तप मनुष्य के मनोबल को सुदृढ़ करता है और जो अपनी रसना तथा इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही सच्चा तपस्वी बनकर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।मुनि हिम कुमार ने प्रेरणादायी गीत के माध्यम से तप की अनुमोदना करते हुए तपस्वियों का उत्साहवर्धन किया। सुरेश कोठारी तथा जितेंद्र जीरावाला ने भी तप की महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए। खुश्बू देवी भंसाली, महक सालेचा, कीर्तन संकलेचा एवं प्रज्ञा संकलेचा ने तपस्वियों का तप की बोली बोलकर अभिनंदन किया। समारोह में होसपेट से पहुंचीं सुप्रिया देवी तलेसरा तथा हुब्बल्ली से आए विनोद वैदमुथा ने आठ उपवास का प्रत्याख्यान ग्रहण कर तप साधना का संकल्प लिया। तपस्वियों के अभिनंदन समारोह में तेरापंथ सभा, महिला मंडल, तेयूप, किशोर मंडल तथा ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धम्म जागरण को नई ऊर्जा प्रदान की।