वारदात के बाद पुलिस को आरोपित की तलाश में दर-दर भटकना पड़ता है। नौकर, चालक सहित अन्य कामगारों के वेरिफिकेशन को लेकर समय-सयम पर डीजीपी, पुलिस कमिश्नर सहित अन्य आलाधिकारियों द्वारा निर्देश जारी किया जाता है। जबकि डीसीपी ईस्ट ने मोबाइल एप भी बना रखा है। पुलिस वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी सीएलजी मैम्बर से लेकर बीट कांस्टेबल तक को सौंपी गई है। हर साल नौकर, चालक व अन्य कामगारों द्वारा करीब पचास से अधिक वारदातों को अंजाम दे दिया जाता है। वेरिफिकेशन को लेकर पुलिस को सुध वारदात के बाद ही आती है।