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गहलोत सरकार में मंत्री रहे रामलाल जाट के खिलाफ नहीं होगी CBI जांच, हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सुनवाई चार सप्ताह टाल दी।
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जयपुर

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Anil Prajapat

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Updated: 25 Feb 2025, 8:34 AM IST

Ramlal-Jat

जयपुर। राजस्थान सरकार ने पिछले साल प्रदेश में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) जांच का रास्ता खोल दिया, लेकिन अब सरकार कांग्रेस शासन में मंत्री रहे रामलाल जाट व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव के खिलाफ सीबीआइ जांच के हाईकोर्ट आदेश के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सुनवाई चार सप्ताह टाल दी।

हाईकोर्ट ने जाट व श्रीवास्तव सहित अन्य के खिलाफ भीलवाड़ा जिले के करेडा थाने में दर्ज खान से मशीनरी चोरी के दो मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार, आरोपी सुरेश जाट व राजकुमार विश्नोई की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर सोमवार को न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने सुनवाई की।

इस कारण सीबीआई को सौंपी जांच

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि जब प्रभावशाली राजनेता और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के हित जुड़े हों, तो राज्य पुलिस के अधीन काम करने वाली एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उच्च अधिकारियों के प्रभाव को देखते हुए सीबीआइ जांच आवश्यक है।

राज्य सरकार की दलील

राज्य सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट आदेश में पुलिस के पक्षपाती होने या जांच करने में अक्षम होने का ठोस प्रमाण नहीं बताया। इसके अलावा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 362 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 403 के अंतर्गत किसी आदेश को वापस लेने और संशोधित करने की अनुमति नहीं है। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता परमेश्वर रामलाल जोशी ने हाईकोर्ट से पहले याचिका वापस ले ली और समान याचिका पुन: दायर कर दी। हाईकोर्ट ने इस याचिका के आधार पर कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे रामलाल जाट व अतिरिक्त महानिदेशक के भाई की लिप्तता का हवाला देकर जांच सीबीआई को सौंप दी। राज्य सरकार ने एडीजी का जांच से संबंध नहीं होने की सफाई दी, वहीं शिकायतकर्ता पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया।

पुलिस मामले की जांच करने में सक्षम

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने सीबीआइ जांच के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस मामले की जांच करने में सक्षम है और निष्पक्ष जांच की जा रही है। असाधारण परिस्थितियों में ही सीबीआइ को जांच दी जानी चाहिए, इसे पुलिस जांच का नियमित विकल्प नहीं बनाया जा सकता। उधर, सीबीआइ जांच की मांग करने वाले परिवादी परमेश्वर रामलाल जोशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया।

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क्या है मामला

कारोबारी और राजसमंद के झीलवाड़ा निवासी परमेश्वर जोशी ने खान के लिए वर्ष 2009 में जमीन खरीदी और वर्ष 2011 में ब्लैक माउंट प्राइवेट लि. कंपनी का गठन किया। इसके बाद कंपनी के शेयरों का बंटवारा किया। अलग-अलग कंपनी के नाम से लीज नंबर 66, 67 और 68 का आवंटन किया। अक्टूबर 2014 तक तीनों खानों में खनन कार्य शुरू हो गया। साझेदारी का विवाद होने पर अप्रेल 18 में आइपीएस अधिकारी के नजदीकी खान कारोबार में साझेदार हो गए।

इस दौरान विवाद होने पर मामला एसओजी तक पहुंचा। खान से मशीन चोरी का मामला दर्ज करवाया। इसी दौरान कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे रामलाल जाट की खान में एंट्री हो गई। रामलाल की पत्नी, भतीजा सुरेश जाट और भाई के बेटे की पत्नी साझेदार हो गए। पुलिस ने रेंट नोट को आधार बनाकर दर्ज मामले में एफआर लगा दी थी।


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