
जयपुर. सौंदर्यन के नाम पर जवाहर सर्किल से नंदपुरी बायपास तक हरे पेड़ों पर कुल्हाड़े चलाने के बाद भी जेडीए का दिल इस हरियाली के घाव देख नहीं पिघला और अब फिर एक किमी की दूरी में हरे-भरे पेड़ों को ठूंठ बनाने की कवायद शुरू कर दी है और इस बार निशाने पर मालवीय नगर के प्रधान मार्ग से बालाजी मोड़ तक एक किमी की विकसित ग्रीन बैल्ट है। फुटपाथ बनाने के लिए 150 से 200 पेड़ों की जड़ें फिर से खोद दी गई हैं।
उधर, इस पेड़ से भी नहीं लिया सबक
प्रधान मार्ग से बालाजी मोड़ के बीच सड़क पर खड़ा एक सूखा ठूंठ विकास के नाम पर हुए विनाश का जीती-जागती मिसाल बना हुआ है। यह सूखा पेड़ कभी हवा-छांव बिखेरता था। लेकिन सड़क बनाने के लिए इसकी जड़ों को डामर में चुन दिया गया। धीरे-धीरे कर यह पेड़ अपना वास्तविक अस्तित्व खोकर ठूंठ बन गया और हरियाली खत्म होती जा रही और पेड़ों को काटकर बड़ी- बड़ी इमारतें और सड़के बनाएं जा रहे हैं और पर्यावरण को हानि पहुंचा रहे हैं।
पर्यावरण से पृथ्वी का गहरा नाता है। इस रिश्ते की डोर को सबसे मजबूती से जिसने बांधे रखा है वे पेड़ हैं। लेकिन दरख्तों की बेहिसाब कटाई और कंक्रीट के जंगलों के बीच आज अगर हम छांव को तरसते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि इन हालातों के जनक भी हम ही हैं। बल्कि अधिकांश जिलों में तो लक्ष्य से आगे जाकर वृक्षारोपण किया गया। लेकिन इसी महकमे के पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि बीते पांच-दस सालों में कितने पेड़ काटे गए।
गजेंद्र सिंह तंवर, मालवीय ने कहा कि जिस तरह से ग्रीनरी को समाप्त किया गया है, उससे लगता है कि जेडीए को हरियाली से ज्यादा कंक्रीट पसंद है।
मगन गोयल, मालवीय नगर ने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च कर पहले ग्रीन बैल्ट क्यों बनाई। अब क्यों इसे समाप्त कर फुटपाथ बनाया जा रहा है। बार-बार पैसे की बर्बादी से जेडीए की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
Published on:
23 Apr 2018, 1:21 PM IST
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